Sannen Goat: खेती और पशुपालन के क्षेत्र में कश्मीर के ठंडे इलाकों में इन दिनों एक खास विदेशी नस्ल की बकरी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। स्विट्जरलैंड की मशहूर सानेन बकरी, जिसे दुनिया भर में “मिल्क क्वीन” कहा जाता है, अपनी असाधारण दूध उत्पादन क्षमता के कारण किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनती जा रही है। जहां सामान्य बकरी एक से दो लीटर दूध देती है, वहीं सानेन बकरी प्रतिदिन लगभग 7 लीटर तक दूध देने में सक्षम है।
खासियत और पहचान से बनी अलग पहचान
सानेन बकरी का संबंध स्विट्जरलैंड की सानेन घाटी से है और यह पूरी तरह सफेद रंग की होती है। इसका स्वभाव शांत होता है और शरीर की बनावट इसे अधिक दूध उत्पादन के लिए उपयुक्त बनाती है। लंबे समय तक दूध देने की क्षमता के कारण इसे डेयरी व्यवसाय के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली यह नस्ल छोटे किसानों के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है।
पोषण और गुणवत्ता में भी आगे
सानेन बकरी का दूध केवल मात्रा में ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता में भी बेहद खास माना जाता है। इसमें A2 प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो इसे आसानी से पचने योग्य बनाता है। यह दूध बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है। आजकल बाजार में बकरी के शुद्ध दूध और उससे बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
कम लागत में बड़ा मुनाफा दे रहा पशुपालन
पशुपालन अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में उभर रहा है। सानेन बकरी इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसे पालने के लिए बड़े फार्म की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि छोटे किसान भी सीमित संसाधनों में इसकी शुरुआत कर सकते हैं। दो-तीन बकरियों से शुरू किया गया यह व्यवसाय समय के साथ बड़े डेयरी यूनिट में बदल सकता है। सरकार भी विदेशी नस्लों के पालन को बढ़ावा देकर किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में प्रयास कर रही है।









