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भारत के पूर्व मेजर जनरल ने की युद्ध की अपील, बोले- जगुआर, राफेल, 5th जेनरेशन एयरक्राफ्ट निकालो और कर दो खात्मा!

On: April 23, 2025 10:52 AM
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भारत के पूर्व मेजर जनरल ने की युद्ध की अपील, बोले- जगुआर, राफेल, 5th जेनरेशन एयरक्राफ्ट निकालो और कर दो खात्मा!

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया है। बैसारन घाटी में 28 पर्यटकों की निर्मम हत्या और 20 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना ने देश में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। भारतीय खुफिया सूत्रों ने इस हमले में पाकिस्तान के शामिल होने की आशंका जताई है, जबकि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इससे इनकार किया है। हमले से ठीक छह दिन पहले 16 अप्रैल 2025 को पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने कश्मीर और टू-नेशन थ्योरी पर भड़काऊ भाषण दिया था, जिसे अब हमले का ट्रिगर माना जा रहा है। इस बीच, भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल गगन दीप बक्शी ने पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने की अपील की है, साथ ही चीन और बांग्लादेश से सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

पहलगाम आतंकी हमला: क्या हुआ?

22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 2:50 बजे, पहलगाम के बैसारन घाटी में, जो ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर है, 4-6 आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। ये आतंकी सेना की वर्दी में थे और जंगल से निकलकर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनका नाम और धर्म पूछा, इस्लामिक आयतें सुनाने को कहा, और फिर नजदीक से गोलियां बरसाईं। मरने वालों में 24 भारतीय पर्यटक, 2 स्थानीय लोग, और नेपाल व UAE के 2 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। घायलों में गुजरात, तमिलनाडु, और महाराष्ट्र के लोग हैं। हमले में एक 26 वर्षीय नौसेना अधिकारी और एक खुफिया ब्यूरो अधिकारी भी शहीद हुए।

द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF), जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सहयोगी संगठन है, ने हमले की जिम्मेदारी ली है। TRF ने दावा किया कि यह हमला कश्मीर में ‘जनसांख्यिकीय बदलाव’ के खिलाफ था, क्योंकि भारत ने 2019 में आर्टिकल 370 हटाने के बाद गैर-स्थानीय लोगों को वहां जमीन और नौकरी के अधिकार दिए हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने LeT कमांडर सैफुल्लाह खालिद (उर्फ कसूरी) को हमले का मास्टरमाइंड बताया है, जो हाफिज सईद के करीबी और पाकिस्तानी सेना के समर्थन में काम करता है।

पाकिस्तान कनेक्शन: आसिम मुनीर का भाषण

हमले से छह दिन पहले, 16 अप्रैल 2025 को इस्लामाबाद में ओवरसीज पाकिस्तानिस कन्वेंशन में जनरल आसिम मुनीर ने भड़काऊ भाषण दिया था। उन्होंने कहा, “कश्मीर हमारी गर्दन की नस था, है और रहेगा। हम अपने कश्मीरी भाइयों को कभी नहीं छोड़ेंगे।” मुनीर ने टू-नेशन थ्योरी का जिक्र करते हुए कहा, “हमारे पूर्वजों का मानना था कि हम हिंदुओं से हर तरह से अलग हैं। हमारा धर्म, रीति-रिवाज, परंपराएं, विचार, और महत्वकांक्षाएंअलग हैं। यही 1947 के बंटवारे का आधार था।” उन्होंने विदेशी पाकिस्तानियों से कहा कि वे अपने बच्चों को पाकिस्तान की कहानी सुनाएं ताकि उनकी राष्ट्रीय पहचान कमजोर न हो।

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भारतीय खुफिया सूत्रों का कहना है कि मुनीर का यह भाषण आतंकी संगठनों के लिए एक ‘डॉग-व्हिसल’ (छिपा संदेश) था। हमले में आतंकियों द्वारा कलमा पढ़ने की मांग और धर्म आधारित हत्याएं मुनीर के हिंदू-मुस्लिम विभाजन वाले बयान से प्रेरित थीं। राज्यसभा सांसद कपिल सिबल ने कहा, “मुनीर का ‘जगुलर वेन’ बयान और यह हमला स्पष्ट रूप से राज्य प्रायोजित है। यह सुनियोजित साजिश थी।” भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने जवाब में कहा, “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान का इससे एकमात्र संबंध 1948 में अवैध कब्जे वाली जमीन को खाली करना है।”

मेजर जनरल जीडी बक्शी की अपील: “यह युद्ध की आहट है”

भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल गगन दीप बक्शी ने पहलगाम हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे पाकिस्तान की सोची-समझी साजिशकरार देते हुए कहा, “यह युद्ध की आहट है। भारतीय सेना को तैयार होना चाहिए। जगुआर, राफेल, और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट निकालो। सिर्फ 300 नहीं, 1300 की जरूरत है। आतंकियों के सिर कलम करो।” बक्शी ने कहा, “ये कसाई मासूम बच्चों, महिलाओं, और पर्यटकों को मारते हैं और फिर पीएम मोदी को चुनौती देते हैं। क्या पाकिस्तान सोचता है कि वह बच जाएगा? क्या वहां किसी को इन बेगुनाहों की मौत पर जरा सा भी दुख है?”

बक्शी ने चीन और बांग्लादेश से भी सतर्क रहने की चेतावनी दी। उन्होंने 2020 गलवन घाटी संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव बरकरार है। साथ ही, चिकेन नेक इलाके (पश्चिम बंगाल-सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के पास बांग्लादेशी सीमा पर पाकिस्तानी ISI और सेना के अधिकारियों की गतिविधियां देखी गई हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव आया है, और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर पहले से ही स्थिति खराब है। बक्शी ने कहा, “यह जानबूझकर उकसाने और अपमान की साजिश है। भारत को इसका जवाब देना होगा।”

भारत सरकार और सेना की प्रतिक्रिया

हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सऊदी अरब यात्रा बीच में छोड़कर दिल्ली लौट आए और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल व विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर पहुंचे और बैसारन घाटी का दौरा कर सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच शुरू कर दी है, और सेना ने हेलीकॉप्टर व HAL ध्रुव का उपयोग कर आतंकियों की तलाश तेज कर दी है। 23 अप्रैल 2025 को बारामूला में LoC पर एक घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया गया।

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पीएम मोदी ने X पर लिखा, “पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” कश्मीर में बंद का ऐलान किया गया, और IPL मैचों में खिलाड़ियों ने काली पट्टी पहनकर शोक जताया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

  • पाकिस्तान: विदेश मंत्रालय ने हमले पर चिंता जताई और शोक व्यक्त किया, लेकिन रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा, “पाकिस्तान का इससे कोई संबंध नहीं है। यह भारत का आंतरिक मामला है।”

  • चीन: भारत में चीनी राजदूत Xu Feihong ने हमले की निंदा की और शोक जताया।

  • अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति JD Vance ने हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता जताई।

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  • रूस, इटली, श्रीलंका, UAE, EU, और UN ने भी हमले की निंदा की।

भारत का अगला कदम?

मेजर जनरल जीडी बक्शी ने भारत से सैन्य कार्रवाई की मांग की है, जिसमें हवाई हमले और आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की ISI और LeT ने हमले की रेकी की थी। पहलगाम हमला 2019 पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत सर्जिकल स्ट्राइक या बालाकोट जैसी कार्रवाई कर सकता है।

जम्मू-कश्मीर में 2024 में 35 लाख पर्यटक आए थे, और 46 आतंकी घटनाएं हुई थीं, जो 2019 के 153 से काफी कम हैं। लेकिन यह हमला कश्मीर की शांति और पर्यटन पर बड़ा आघात है। पूर्व J&K DGP शेष पॉल वैद ने इसे ‘पुलवामा 2.0’ और ‘हमास-शैली’ हमला बताया।

कावेरी

कावेरी "द न्यूज़ रिपेयर" की एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। कावेरी का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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