महात्मा गांधी के सेवाग्राम आश्रम में बन रही खादी पर विवाद, खादी ग्रामोद्योग ने दी चेतावनी

Published On: April 17, 2022
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वर्धा: खादी ग्रामोद्योग आयोग ने महात्मा गांधी के सेवाग्राम आश्रम जो महाराष्ट्र के वर्धा में है में बन रही खादी को लेकर बड़ा आरोप लगाया है. खादी ग्रामोद्योग आयोग ने आरोप लगाया है कि सेवाग्राम आश्रम में खादी नाम के ब्रांड का इस्तेमाल कर अप्रमाणित खादी का कपड़ा अवैध रूप से बेचा जा रहा है.

साथ ही खादी ग्रामोद्योग आयोग ने आश्रम को तत्काल बिक्री बंद करने की चेतावनी दी है, साथ ही ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की बात भी कही गई है.

वहीं सेवाग्राम आश्रम के प्रबंधन नेखादी मार्कको अपनाने की मजबूरी पर अपना विरोध जताया है. सेवाग्राम आश्रम ने स्पष्टीकरण दिया है कि महात्मा गांधी के आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर आधारित खादी को किसी निशान की जरूरत नहीं है.

पूरे मामले को समझिए-

दरअसल, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने 25 मार्च को सेवाग्राम आश्रम मेंखादी ग्रामोद्योग स्टोरका निरीक्षण किया.

उन्होंने पाया कि आश्रम में बिक्री के लिए रखे खादी के कपड़े परखादी का निशाननहीं था.

इसलिए यह अवैध है और खादी आयोग ने इस खादी की बिक्री पर रोक लगाने के लिए आश्रम प्रबंधन को पत्र भेजा है.

आयोग का कहना है कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग से किसी भी प्रकार खादी वस्त्र की बिक्री के लिए खादी प्रमाण पत्र और खादी चिह्न की आवश्यकता होती है.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सेवाग्राम आश्रम के सदस्य अविनाश काकड़े ने कहा, ”सरकार खादी आंदोलन को खत्म करने की योजना बना रही है. आंदोलन को बढ़ावा देने वालेखादीशब्द को केंद्र सरकार ने हटा लिया है.”

सेवाग्राम आश्रम में खादी आयोग की स्थापना के पूर्व से ही गांधी का काम चलता आया है. यहां उत्पादित खादी का कपड़ा बिक्री के लिए रखा जाता है. इसके अलावा सेवाग्राम आश्रम क्षेत्र के कुछ अन्य चुनिंदा, मान्यता प्राप्त खादी संस्थानों से मांग पर खरीदता है और दुकानों में बेचता है.

इस पूरे मामले पर सेवाग्राम आश्रम के अध्यक्ष टी प्रभु ने कहा, ”सेवाग्राम आश्रम 1936 से खादी की कताई और बिक्री में लगा हुआ है. हालांकि, आश्रम में खादी का उत्पादन ज्यादा नहीं है क्योंकि आश्रम प्रबंधन के पास सूत की कताई के लिए हथकरघा नहीं है.’’

उन्होंने आगे कहा ‘’हम जल्द ही विस्तार करेंगे. खादी आयोग ने हमारी खादी को अवैध घोषित कर दिया है. सेवाग्राम आश्रम समिति ने खादी चिह्न का प्रयोग नहीं करने का निर्णय लिया है

कावेरी

कावेरी "द न्यूज़ रिपेयर" की एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। कावेरी का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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