Haryana News: हरियाणा में शिक्षा का अधिकार कानून को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने 609 ऐसे निजी स्कूलों और 891 अन्य स्कूलों को राहत दी है, जिन्होंने समय पर आरटीई सीटों का विवरण या मान्यता से जुड़े दस्तावेज अपलोड नहीं किए थे। अब इन सभी स्कूलों के लिए MIS Portal को शर्तों के साथ दोबारा खोल दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी 1500 स्कूलों को अब अनिवार्य रूप से अपने मान्यता संबंधी दस्तावेज अपलोड करने होंगे और Right to Education Act (RTE) के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों का पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
महिपाल ढांडा ने कहा कि प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के लिए यह जरूरी है कि वे कक्षा पहली और उससे पहले की कक्षाओं में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करें। यह प्रावधान शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।
जानकारी के अनुसार, राज्य के 9230 निजी स्कूलों में से 8621 स्कूलों ने समय पर आरटीई सीटों का विवरण अपलोड कर दिया था, लेकिन 609 स्कूल ऐसा करने में विफल रहे। इसके अलावा 891 स्कूलों ने मान्यता से संबंधित जरूरी दस्तावेज भी अपलोड नहीं किए थे, जिसके चलते उनकी प्रविष्टियां अस्वीकार कर दी गईं और पोर्टल अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।
बाद में निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने सरकार से मुलाकात कर बताया कि पोर्टल बंद होने से प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसके बाद सरकार ने छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए पोर्टल को दोबारा खोलने का निर्णय लिया।
इस बीच हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडु ने चिराग योजना के तहत दाखिला तिथि बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 13 से 30 मार्च के बीच आवेदन और 1 से 15 अप्रैल के बीच स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) लेने की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन छुट्टियों और शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी के कारण कई बच्चों को समय पर SLC नहीं मिल पाया।







