IAS Success Story: मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मी सविता प्रधान की जिंदगी बचपन से ही संघर्षों से भरी रही। एक आदिवासी परिवार में पली-बढ़ीं सविता का परिवार बेहद साधारण था, जहां दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती था। धान की कटाई, गोबर उठाना और महुआ बीनना जैसे कामों में उनका बचपन बीता। जिस गांव में लड़कियों को स्कूल भेजने की परंपरा नहीं थी, वहां सविता ने 10वीं तक पढ़ाई कर इतिहास रच दिया। वह अपने गांव की इकलौती लड़की थीं जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
7 किलोमीटर पैदल चलकर की पढ़ाई
10वीं के बाद सविता का दाखिला शासकीय स्कूल में हुआ, जो उनके घर से 7 किलोमीटर दूर था। आर्थिक तंगी इतनी थी कि रोज बस का 2 रुपये किराया देना भी मुश्किल होता था। ऐसे में वह कई बार रोज 7 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती थीं। डॉक्टर बनने का सपना लेकर उन्होंने 11वीं में मेडिकल साइंस चुना, लेकिन किस्मत ने एक और कठिन मोड़ ले लिया।
कम उम्र में शादी और दर्दनाक ससुराल
सिर्फ 16 साल की उम्र में सविता की शादी उनसे 10 साल बड़े व्यक्ति से कर दी गई। पढ़ाई जारी रखने के वादों के बीच शुरू हुआ यह रिश्ता जल्द ही उनके लिए अत्याचार का कारण बन गया। ससुराल में उन्हें मानसिक और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा। हालात इतने बदतर थे कि कई बार उन्हें छिपकर खाना तक खाना पड़ता था।
टूटी नहीं हिम्मत, बदली जिंदगी की दिशा
दो बच्चों की मां बनने के बाद भी अत्याचार कम नहीं हुआ। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने हार मानने की कोशिश की, लेकिन उसी पल उन्होंने खुद को संभाला और जिंदगी से लड़ने का फैसला किया। ससुराल छोड़कर उन्होंने खुद अपने पैरों पर खड़े होने की ठानी।
संघर्ष के साथ पढ़ाई जारी
सविता ने ट्यूशन पढ़ाकर और पार्लर का काम करके अपनी पढ़ाई जारी रखी। तमाम मुश्किलों और बाधाओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। कई बार उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, यहां तक कि परीक्षा के दिन भी उन्हें अपमानित किया गया, लेकिन उन्होंने हर बार खुद को संभाला और आगे बढ़ती रहीं।
पहली ही कोशिश में सफलता
सविता ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और पहली ही कोशिश में सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने UPSC Civil Services Examination की तैयारी शुरू की और साल 2017 में पहले ही प्रयास में प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों चरण पार कर लिए।
आज बनीं मिसाल
आज Savita Pradhan एक IAS अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और समाज में खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। वह शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।













