Haryana News: हरियाणा में करनाल जिले की दो ग्राम पंचायतों में सरकारी और गैर काश्त योग्य जमीन को फर्जी तरीके से खेती योग्य दिखाकर बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि श्मशान घाट, स्कूल और गौचरान जैसी जमीन को भी “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर खेती योग्य दिखाकर निजी लोगों के नाम दर्ज किया गया और आर्थिक लाभ लिया गया।
मामले की जांच के बाद जिला उपायुक्त ने ग्राम पंचायत अमुपुर और ग्राम पंचायत सांभली के सरपंचों को निलंबित कर दिया है। प्रशासन ने पंचायत की चल-अचल संपत्ति बहुमत प्राप्त पंच को सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उपमंडल अधिकारी (ना.) नीलोखेड़ी को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
शिकायत से शुरू हुई जांच
गांव सांभली निवासी पंच बलराज शर्मा ने जिला प्रशासन को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत सांभली और अमुपुर के सरपंचों ने गैर काश्त और बंजर जमीन को भी “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर गेहूं और धान सीजन 2023-24 तथा 2024-25 में निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करवा दिया।
सरकारी जमीन पर दिखाई गई खेती
शिकायत में कहा गया कि पंचायतों ने सरकारी जमीन पर कागजों में फसल उगाकर उसे मंडियों में बेचने तक का रिकॉर्ड तैयार किया। जांच में सामने आया कि एक आढ़ती और उसके परिवार को किसान दिखाकर पोर्टल पर पंजीकरण किया गया, जबकि जमीन पर असल खेती कोई अन्य व्यक्ति कर रहा था।
जांच रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट के अनुसार गांव अमुपुर में लगभग 94 एकड़ जमीन थी, जिसमें से 6 एकड़ से अधिक जमीन गैर काश्त योग्य थी। इसके बावजूद पूरी जमीन को एक व्यक्ति के नाम पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया।
इसी तरह गांव सांभली में करीब 48 एकड़ जमीन में से 30 एकड़ से अधिक भूमि गैर काश्त और गैर मुमकिन श्रेणी में थी। इसके बावजूद जमीन को ईश्वर चंद, उसके बेटे और पुत्रवधु के नाम दर्ज किया गया।
आढ़ती परिवार को किसान दिखाकर लिया लाभ
जांच में यह भी सामने आया कि आढ़ती परिवार को किसान दर्शाकर फर्जी तरीके से फसल रिकॉर्ड तैयार किया गया। गैर काश्त योग्य जमीन को खेती योग्य दिखाकर फसल बेचने और आर्थिक लाभ लेने का आरोप सही पाया गया।
नोटिस और सुनवाई के बाद कार्रवाई
संयुक्त जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। मार्च में हुई सुनवाई के बाद प्रशासन ने दोनों सरपंचों को सस्पेंड करने का फैसला लिया।
30 दिन में पूरी होगी जांच
जिला प्रशासन ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी। उपमंडल अधिकारी को 30 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।







