Haryana News: हरियाणा में अब कॉलोनियों और हाउसिंग सोसायटी विकसित करने वाले बिल्डरों और कॉलोनाइजरों पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। अधिभोग प्रमाणपत्र (ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट) मिलने के बावजूद समय पर घोषणा विलेख दाखिल नहीं करने पर अब 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
90 दिन के भीतर दाखिल करना होगा घोषणा विलेख
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अनुसार अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद बिल्डर या डेवलपर को 90 दिनों के भीतर घोषणा विलेख विभाग के समक्ष दाखिल करना अनिवार्य होगा।
घोषणा विलेख एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज माना जाता है, जिसमें संपत्ति के स्वामित्व, क्षेत्रफल, साझा सुविधाओं और कानूनी अधिकारों का पूरा विवरण दर्ज होता है। इसे मुख्य रूप से अपार्टमेंट अधिनियम के तहत फ्लैट मालिकों के अधिकार स्पष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है।
हरियाणा अपार्टमेंट स्वामित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने हरियाणा अपार्टमेंट स्वामित्व अधिनियम 1983 की धारा 24ए के तहत जुर्माने का निर्धारण किया है।
सरकार के अनुसार अधिनियम लागू होने की तिथि से हर तीन वर्ष बाद न्यूनतम जुर्माने की राशि में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। यदि कोई बिल्डर जुर्माना जमा नहीं करता, तो यह राशि भू-राजस्व बकाया की तरह वसूली जाएगी।
30 अक्टूबर 2025 के बाद लागू होंगे नए नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन बिल्डरों ने 30 अक्टूबर 2025 तक घोषणा विलेख दाखिल नहीं किया है, उन्हें दो अलग-अलग अवधियों के अनुसार जुर्माना देना होगा।
अध्यादेश लागू होने से पहले की अवधि के लिए 7 जनवरी 2013 की पुरानी समझौता नीति लागू रहेगी, जबकि 30 अक्टूबर 2025 के बाद की अवधि पर नए प्रावधानों के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा।
उदाहरण देकर समझाया नया जुर्माना नियम
सरकार द्वारा जारी उदाहरण के अनुसार यदि किसी कॉलोनाइजर को 1 जून 2025 को अधिभोग प्रमाणपत्र मिलता है, तो उसे 30 अगस्त 2025 तक घोषणा विलेख दाखिल करना होगा।
अगर वह 1 फरवरी 2026 को घोषणा विलेख दाखिल करता है, तो उसे 30 अक्टूबर 2025 तक की अवधि के लिए पुरानी नीति के अनुसार 1 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। वहीं इसके बाद की 94 दिनों की देरी पर नए नियमों के अनुसार 30 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
पुरानी नीति मानी जाएगी निरस्त
सरकार ने साफ किया है कि 30 अक्टूबर 2025 से पुरानी समझौता नीति स्वतः निरस्त मानी जाएगी और इसके बाद सभी मामलों में नए प्रावधान लागू होंगे।








