Haryana News: हरियाणा में आंगनबाड़ी व्यवस्था को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि 4,000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को अब सरकारी भवनों में स्थानांतरित किया जाएगा। ये वे केंद्र हैं जो अब तक किराए के कमरों या अस्थायी ढांचों में संचालित हो रहे थे।
इस योजना को लागू करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में खाली पड़े सरकारी भवनों या स्कूलों में उपयुक्त स्थान चिन्हित करें, ताकि इन केंद्रों को जल्द से जल्द वहां शिफ्ट किया जा सके।
कई केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी
प्रदेश में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे स्थानों पर चल रहे हैं, जहां बच्चों के लिए पर्याप्त जगह, साफ-सफाई, शौचालय और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कई जगह एक छोटे से कमरे में ही बच्चों को बैठाना पड़ता है, जबकि कुछ केंद्र टिनशेड के नीचे संचालित हो रहे हैं। इन परिस्थितियों का सीधा असर बच्चों के पोषण और मानसिक विकास पर पड़ रहा है।
सरकारी भवनों में मिलने वाली सुविधाएं
सरकार का उद्देश्य है कि इन केंद्रों को स्कूलों या अन्य सरकारी भवनों में शिफ्ट कर बच्चों को बेहतर माहौल दिया जाए। इससे उन्हें खुले मैदान, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षित पेयजल जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जो उनके समग्र विकास के लिए जरूरी हैं।
‘सक्षम आंगनबाड़ी’ के रूप में होगा विकास
सरकार केवल स्थान परिवर्तन तक सीमित नहीं रहना चाहती। जिन केंद्रों को सरकारी भवनों में सफलतापूर्वक स्थापित किया जाएगा, उन्हें ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों में आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी, इनमें LED स्क्रीन के माध्यम से डिजिटल लर्निंग, बच्चों के पोषण के लिए ‘पोषण वाटिका’, बेहतर खेल और शिक्षण सामग्री शामिल है।
प्री-स्कूल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार, आंगनबाड़ी बच्चे की पहली पाठशाला होती है। यदि यहां बेहतर वातावरण मिलेगा, तो बच्चों की सीखने की क्षमता और स्वास्थ्य दोनों में सुधार होगा। आंगनबाड़ियों को सरकारी स्कूलों से जोड़ने का उद्देश्य भी यही है कि बच्चे आगे की पढ़ाई के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें।









