Haryana: हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया ये नोटिस

Published On: May 6, 2026
Follow Us

Haryana News: हरियाणा में पंचकूला के चर्चित नेशनल हेराल्ड प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कानूनी चुनौतियां एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हुड्डा को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में निर्धारित की गई है, जिससे इस केस ने नया मोड़ ले लिया है।

इससे पहले फरवरी 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रथम दृष्टया सबूत नहीं है जिससे आरोपियों के खिलाफ अपराध सिद्ध हो सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई निर्णय नीति या दिशा-निर्देशों के विपरीत हो, तो केवल उसी आधार पर उसे भ्रष्ट या दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता।

इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट द्वारा तय आरोपों को रद्द कर दिया गया था और पूरे मामले की कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद विशेष सीबीआई अदालत और प्रवर्तन निदेशालय की अदालत ने भी केस बंद कर दिए थे।

हालांकि अब सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि हाई कोर्ट के निर्णय में गंभीर खामियां हैं। एजेंसी की ओर से पेश तुषार मेहता और एसवी राजू ने दलील दी कि उपलब्ध सबूतों से भ्रष्टाचार निवारण कानून और भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध बनता है, लेकिन उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी करते हुए मामले को विचाराधीन रखा है।

दूसरी ओर, भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने यह निर्णय नेशनल हेराल्ड की ऐतिहासिक भूमिका और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी विरासत को ध्यान में रखते हुए लिया था, न कि किसी निजी लाभ के लिए।

इस विवाद की जड़ पंचकूला सेक्टर-6 के प्लॉट नंबर C-17 से जुड़ी है, जिसे 1982 में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को ‘नो-प्रॉफिट, नो-लॉस’ आधार पर दिया गया था। निर्माण समय पर न होने के कारण 1996 में यह प्लॉट वापस ले लिया गया था और बाद की अपीलें भी खारिज हो गई थीं। हालांकि 2005 में हुड्डा के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस प्लॉट को दोबारा पुरानी दरों पर एजेएल को आवंटित किया गया, जिससे विवाद खड़ा हुआ।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह पुनः आवंटन नियमों के खिलाफ था और इससे राज्य को लगभग 1.75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, एजेएल ने इस जमीन को आधार बनाकर करीब 72.57 करोड़ रुपये के ऋण भी हासिल किए। सीबीआई का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में सत्ता का दुरुपयोग कर कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

google-site-verification: google37146f9c8221134d.html

Sahab Ram

साहब राम "द न्यूज़ रिपेयर" के एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। साहब का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment