Haryana News: हरियाणा में सोनीपत नगर निगम मेयर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के घोषित मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने अचानक चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। उनके इस फैसले के पीछे पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी, पार्षद टिकटों को लेकर असंतोष और पिछले उपचुनाव में हुई हार को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कमल दीवान ने एक दिन पहले ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र, राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी की मौजूदगी में एडीसी कार्यालय पहुंचकर नामांकन दाखिल किया था, लेकिन अब उन्होंने चुनावी मैदान से पीछे हटने का फैसला कर लिया है।
सूत्रों के अनुसार, दीवान 2023 के मेयर उपचुनाव में मिली करारी हार को अभी तक भूल नहीं पाए हैं, जहां उन्हें लगभग 35,766 वोटों के अंतर से पराजय झेलनी पड़ी थी। उस समय भी उन्होंने पार्टी के कुछ पार्षदों और नेताओं पर भीतरघात के गंभीर आरोप लगाए थे। माना जा रहा है कि इस बार भी उन्हीं नेताओं से जुड़े लोगों को टिकट दिए जाने की चर्चा से वे नाराज थे।
इस बार विवाद का बड़ा कारण पार्षद टिकटों का वितरण बताया जा रहा है। पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार के करीबी माने जाने वाले कुछ चेहरों को टिकट दिए जाने की संभावना से कमल दीवान असंतुष्ट थे। उनका कहना था कि जिन लोगों पर पहले भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगे थे, उन्हें फिर से मौका दिया जा रहा है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कमल दीवान ने अपने फोन बंद कर लिए और किसी से संपर्क नहीं किया। जानकारी के मुताबिक, वे फिलहाल अपने परिवार के साथ चर्चा कर रहे हैं और उन्हें अंबाला बुलाया गया है, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी अहम बैठक होनी है। इसी बैठक में उनके चुनाव लड़ने या पीछे हटने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर पार्टी को अपने घोषित उम्मीदवार को मनाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर संगठन में फैली गुटबाजी को नियंत्रित करना भी बड़ी समस्या बन गया है। अंबाला में होने वाली बैठक को इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।







