IAS Success Story: “जब सपने भीतर से आवाज देते हैं, तो रास्ते खुद बन जाते हैं”—यह बात हरियाणा के रोहतक की बेटी अपराजिता सिंह की कहानी पर पूरी तरह सटीक बैठती है। मेडिकल करियर छोड़कर सिविल सेवा में आने का उनका फैसला आसान नहीं था, लेकिन मजबूत इरादों और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
डॉक्टर परिवार से IAS बनने तक का सफर
अपराजिता सिंह का जन्म एक डॉक्टर परिवार में हुआ, जहां माता-पिता और दोनों भाई मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े हैं। ऐसे माहौल में डॉक्टर बनना स्वाभाविक था और उन्होंने इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS), रोहतक से MBBS की डिग्री हासिल की।
नाना-नानी के घर रहकर की पढ़ाई
उन्होंने अपनी पढ़ाई रोहतक में नाना-नानी के घर रहकर पूरी की। साधारण माहौल के बावजूद उन्होंने हमेशा अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखा। स्कूल के दिनों में उनकी हैंडराइटिंग कमजोर थी, जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
डॉक्टर की नौकरी छोड़ चुनी सिविल सेवा
MBBS के बाद उन्होंने डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। करीब 8 घंटे की ड्यूटी के दौरान ही उनके मन में UPSC Civil Services Examination के जरिए IAS बनने का सपना जागा। समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा ने उन्हें डॉक्टरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
पहले प्रयास में असफलता, दूसरे में शानदार सफलता
अपराजिता ने साल 2017 में पहली बार UPSC परीक्षा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी में सुधार किया और 2018 में दूसरे प्रयास में परीक्षा पास कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 82 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया।
मिरर प्रैक्टिस बनी सफलता की कुंजी
इंटरव्यू की तैयारी के दौरान उन्होंने “मिरर प्रैक्टिस” को सबसे अहम बताया। शीशे के सामने बैठकर बोलने से उन्होंने अपनी बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन में सुधार किया। इसका नतीजा यह रहा कि इंटरव्यू में उन्हें 201 अंक मिले और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।









