Haryana News: हरियाणा में आगामी निकाय चुनावों को लेकर हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेन्द्र कल्याण ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का समर्थन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, 13 अप्रैल को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने शिकायत की थी कि कुछ कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर चुनावी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। इन शिकायतों के मद्देनजर 22 अप्रैल को आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद आयोग ने नई गाइडलाइन लागू की है।
जारी निर्देशों के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी उम्मीदवार के लिए वोट नहीं मांगेगा और न ही किसी चुनावी प्रचार का हिस्सा बनेगा। चुनावी सभाओं में कर्मचारियों की उपस्थिति केवल दर्शक के रूप में, वह भी पूर्व अनुमति के साथ ही स्वीकार्य होगी। यदि कोई कर्मचारी बार-बार किसी एक उम्मीदवार की सभाओं में नजर आता है, तो इसे पक्षपात माना जाएगा।
इसके अलावा, किसी मंत्री या राजनेता के निजी कार्यक्रमों जैसे विवाह या सामाजिक समारोह में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को छोड़कर अन्य सरकारी कर्मियों की उपस्थिति पर रोक लगाई गई है।
आयोग ने ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ जारी करने में देरी को भी गंभीर उल्लंघन माना है। उम्मीदवारों को समय पर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए सिंगल विंडो प्रणाली को और सुदृढ़ किया गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है हरियाणा सिविल सर्विस नियम 2016 और मॉडल आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभागों, बोर्डों और निगमों तक इन नियमों की जानकारी पहुंचाई जाए।
साथ ही, सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कर्मचारियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक ई-डैशबोर्ड भी सक्रिय किया गया है, जहां किसी भी प्रकार के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।









