Haryana News: हरियाणा में निजी स्कूलों की मनमानी पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। हरियाणा के शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अभिभावकों को तय दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छात्रों पर जरूरत से ज्यादा किताबों का बोझ डालने वाले स्कूल भी निगरानी में रहेंगे।
शिकायतों के बाद सख्ती
शिक्षा निदेशालय को बड़ी संख्या में शिकायतें मिली थीं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों पर एक ही दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने का दबाव बना रहे हैं। कुछ स्कूलों में तो परिसर के अंदर ही मनमाने दामों पर सामान बेचा जा रहा है।
NEP-2020 के खिलाफ चल रही प्रथाएं
जांच में यह भी सामने आया कि कई स्कूल ऐसी रेफरेंस बुक्स लागू कर रहे हैं जो National Education Policy 2020 और National Curriculum Framework के अनुरूप नहीं हैं। इसके अलावा कुछ स्कूल सेकेंड-हैंड किताबों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर हर साल अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय
शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश दिए हैं कि वे इस तरह की गतिविधियों पर सख्त नजर रखें। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए गए हैं।
शिकायत के लिए हेल्पलाइन जारी
अभिभावकों की सुविधा के लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 जारी किया है, जिस पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
हर साल यूनिफॉर्म बदलने पर नाराजगी
कई स्कूल हर सत्र में यूनिफॉर्म बदलकर अभिभावकों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ डालते हैं। खास लोगो लगाकर केवल तय दुकानों से खरीदने की बाध्यता पर भी विभाग ने आपत्ति जताई है।
बैग का बढ़ता बोझ और नियम
छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल बैग का वजन भी निर्धारित किया गया है, जिसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं:
- कक्षा 1–2: 1 से 1.5 किलोग्राम
- कक्षा 3–5: 2 से 3 किलोग्राम
- कक्षा 6–7: 4 किलोग्राम
- कक्षा 8–9: 4.5 किलोग्राम
- कक्षा 10: 5 किलोग्राम
पानी और सुविधाओं पर भी निर्देश
कुछ स्कूल बच्चों को पानी की बोतल लाने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जबकि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना स्कूल की जिम्मेदारी है। विभाग ने इस पर भी सख्त रुख अपनाया है।







