Haryana News: हरियाणा में बिजली निगमों ने लंबे समय से बकाया बिल न चुकाने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अब एक लाख रुपये से अधिक बकाया रखने वाले डिफॉल्टरों की संपत्ति नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। करोड़ों रुपये की रिकवरी के लिए निगम पहली बार इतनी सख्ती बरत रहा है।
नए नियमों के तहत संबंधित उपभोक्ता को पहले एसडीओ द्वारा तीन नोटिस और उसके बाद कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) द्वारा एक अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा। यदि इसके बावजूद भी उपभोक्ता बिल का भुगतान नहीं करता है, तो मामला तहसीलदार के पास भेजा जाएगा। वहां से अंतिम नोटिस जारी होने के बाद भी भुगतान न होने पर लैंड रिकवरी एक्ट के तहत संपत्ति की नीलामी की जाएगी।
राज्य में बिजली निगमों पर कुल 8247 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें उत्तर हरियाणा का 3573 करोड़ और दक्षिण हरियाणा का 4674 करोड़ रुपये शामिल है। करनाल जिले में ही 2710 डिफॉल्टर हैं, जिन पर करीब 67 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें से सबसे अधिक 1178 डिफॉल्टर सब अर्बन और मेरठ रोड क्षेत्र में हैं।
बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई के तहत डिफॉल्टरों की जमीन, वाहन, मशीनें और यहां तक कि गहनों की भी नीलामी की जा सकती है। साथ ही, जब तक उपभोक्ता अपना बकाया जमा नहीं करता, तब तक वह अपनी संपत्ति की खरीद-फरोख्त भी नहीं कर सकेगा।
बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता नसीब सिंह ने बताया कि 26 डिफॉल्टरों के मामलों को तहसीलदार के पास भेजा जा चुका है, जिन पर कुल 2.27 करोड़ रुपये का बकाया है। आगे भी ऐसे मामलों की सूची तैयार कर कार्रवाई की जाएगी।
जिले में हजारों उपभोक्ता वर्षों से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं। कई मामलों में कनेक्शन काटे जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद बकाया वसूली नहीं हो पाई है। अब निगम सख्त कदम उठाकर इन बकाया राशियों की वसूली सुनिश्चित करने की तैयारी में है।







