चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में फसल खराब होने पर गत 11 सालों में किसानों को मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम के रूप में अब तक 15 हजार 448 करोड़ रुपये की राशि दी है।
मुख्यमंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों का ज़वाब दे रहे थे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गत वर्ष अगस्त-सितंबर,2025 में हरियाणा में भारी बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी जिसका उन्होंने दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होने बताया कि फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 15 सितम्बर तक ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया था। इस नुकसान की भरपाई के लिए 53 हजार 821 किसानों को 116 करोड़ 15 लाख 57 हजार रुपये की मुआवजा राशि जारी कर दी है। इसमें बाजरे की फसल के लिए 35 करोड़ 29 लाख रुपये, कपास के लिए 27 करोड़ 43 लाख रुपये, धान के लिए 22 करोड़ 91 लाख रुपये और गवार के लिए 14 करोड़ 10 लाख रुपये की राशि शामिल है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी सरकार ने बाढ़ के चलते पशु धन की हानि, मकान क्षति तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं के नुकसान की भरपाई के लिए 4 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि जारी की है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों द्वारा बड़ी संख्या में किसानों को मुआवजा नहीं मिलने की बात पर कहा कि इस बारे में हमने जांच करवाई थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि पोर्टल पर पटवारियों द्वारा कुछ रकबे की डुप्लीकेट फोटो अपलोड की गई थी। इस तकनीकी विसंगति के कारण पटवारियों द्वारा डुप्लीकेट फोटो अपलोड करने का यह गंभीर मामला अभी सरकार के विचाराधीन है। इस पर अंतिम निर्णय होते ही शेष पात्र किसानों के संबंध में उचित कार्यवाही की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में फसल खराब होने पर गत 11 सालों में किसानों को मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम के रूप में अब तक 15 हजार 448 करोड़ रुपये की राशि दी जबकि पहले कांग्रेस सरकार के 10 साल के शासनकाल में 1 हजार 138 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जारी की गई थी। कांग्रेस सरकार तो किसानों की 269 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि बकाया छोड़कर चली गई थी। इसे हमने वर्ष 2014 में जनसेवा का दायित्व संभालने के बाद वर्ष 2015 में जारी किया।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा फसलों के लिए एम.एस.पी से संबंधित उठाये गए मुद्दे पर कहा कि किसान हित हमारी नीतियों के केन्द्र में है। हमने अपने संकल्प पत्र 2024 में सभी 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने का संकल्प लिया था। जब 17 अक्तूबर, 2024 को विधिवत रूप से हमारी सरकार बनी तो हमने 19 दिसम्बर को ही किसानों की 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की अधिसूचना जारी कर दी थी।
उन्होंने कहा कि आज हरियाणा देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां किसानों की 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इन्होने बताया कि पिछले 12 सीजन में अब तक 12 लाख किसानों के खातों में फसल खरीद के 1 लाख 64 हजार करोड़ रुपये डाले जा चुके हैं। इतना ही नहीं, हमने पिछले 11 सालों में किसानों को फसल खराबे के मुआवजे के रूप में 15 हजार 457 करोड़ रुपये दिये हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 7 हजार 233 करोड़ रुपये किसानों के खातों में डाले गए हैं।
श्री सैनी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे आबियाने को जड़ से खत्म किया है। हमने किसानों को नकली खाद, बीज और कीटनाशक बेचने व बनाने वालों से बचाने के लिए नया कानून बनाया है। इसके तहत ऐसे लोगों को 5 साल की सजा देने का प्रावधान किया है। खरीफ सीजन-2024 से किसानों की फसल खरीद का पैसा फसल का Exit Gate Pass कटने के 48 घंटे के अन्दर डी.बी.टी. के माध्यम से दे दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया जाना कि यूरिया के बैग का वजन घटाकर किसानों को ठगा जा रहा है। यह बिल्कुल निराधार और तथ्यों से परे है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक नीम-कोटेड यूरिया, जिसमें 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, उसके 45 किलोग्राम के बैग का मूल्य 266.50 रुपये (जीएसटी सहित) पहले की तरह है। इसके वजन या मूल्य में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। किसान आज भी उसी मात्रा और उसी निर्धारित दर पर नीम-कोटेड यूरिया प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गत 28 जून, 2023 को केंद्र सरकार ने सल्फर-कोटेड यूरिया, जिसे ‘यूरिया गोल्ड’ कहा जाता है, अधिसूचित किया। यह एक पृथक एवं उन्नत उर्वरक उत्पाद है, जिसमें 37 प्रतिशत नाइट्रोजन के साथ 17 प्रतिशत सल्फर शामिल है।
उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश कृषि भूमि में सल्फर की कमी पाई जाती है, जिससे विशेष रूप से तिलहन और दलहनी फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। यूरिया गोल्ड न केवल नाइट्रोजन उपयोग दक्षता को बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता सुधारने में भी सहायक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने 5 जनवरी, 2024 को 40 किलोग्राम के यूरिया गोल्ड बैग का अधिकतम मूल्य 266.50 रुपये निर्धारित किया था, जिसे 23 जनवरी, 2026 से घटाकर 254 कर दिया गया है। अर्थात सरकार ने किसानों को राहत दी है, न कि कोई अतिरिक्त बोझ डाला है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए दोनों विकल्प, ‘नीम कोटेड यूरिया’ और ‘यूरिया गोल्ड’ उपलब्ध हैं, ताकि वे अपनी फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार किसी का चयन कर सकें। रबी सीजन 2025-26 में दिनांक 12 फरवरी, 2026 तक राज्य में 10 लाख 32 हजार 116 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि किसानों को यूरिया के नाम पर ठगने की विपक्षी सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई दम नहीं है। ऐसे मुद्दे उठाकर ये बता रहे हैं कि किसानों के हितों को लेकर वे कितने गंभीर हैं।







