Haryana News: हरियाणा में सरकारी फिजूलखर्ची कम करने और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद राज्य सरकार ने वीआईपी वाहनों के बेड़े में 50 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्णय लिया है।
हालांकि इस फैसले की औपचारिक घोषणा मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सरकार का उद्देश्य सरकारी खर्च में कमी लाना, ईंधन की बचत करना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभिन्न विभागों में मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य वीआईपी श्रेणी के लिए उपलब्ध वाहनों की समीक्षा की गई। इसके बाद तय किया गया कि जहां एक से अधिक वाहन तैनात हैं, वहां उनकी संख्या आधी की जाएगी।
इन व्यवस्थाओं में होगा बदलाव
मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त वाहनों की संख्या कम की जाएगी। एस्कॉर्ट और फॉलो कारों की तैनाती की समीक्षा होगी। विभागीय पूल वाहनों के साझा उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर नियंत्रण रखा जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासन में सादगी और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे आम जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि सरकार अनावश्यक खर्च कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए गंभीर है।
मुख्यमंत्री ने खुद भी घटाया कारकेड
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने कारकेड में भी न्यूनतम वाहनों के उपयोग का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से केवल आवश्यक वाहन ही उनके काफिले में शामिल होंगे।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सप्ताह में एक दिन बिना सरकारी वाहन के काम करने का संकल्प भी लिया है। उन्होंने राज्य के मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों से भी यात्रा के दौरान सीमित वाहनों का उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की है।
वर्चुअल बैठकों पर जोर
सरकार ने अधिकतम बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने पर भी बल दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा या भौतिक बैठकों का आयोजन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और ईंधन बचत अभियान में सहभागी बनने की अपील की है।







