Haryana News: हरियाणा के बहुचर्चित 590 करोड़ रुपये के IDFC बैंक घोटाले की जांच अब वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों तक पहुंच गई है। राज्य सरकार ने पांच आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत जांच की अनुमति दे दी है।
सरकार की मंजूरी के बाद अब CBI इन अधिकारियों से पूछताछ कर सकेगी। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने कुल आठ अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति मांगी थी, जिनमें से पांच को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि तीन अधिकारियों के मामलों में मंजूरी अभी लंबित है।
कई विभागों से जुड़े अधिकारी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों के नाम जांच में सामने आए हैं, वे पहले पंचायत एवं विकास विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम और पंचकूला नगर निगम जैसे विभागों में तैनात रह चुके हैं।
इन विभागों में फर्जी खातों और संदिग्ध भुगतान के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन की जांच की जा रही है। मामले में तीन लेखा अधिकारियों को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है।
रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों से मिले नए संकेत
जांच एजेंसियों को गिरफ्तार आरोपियों के बयान, फाइल मूवमेंट, दस्तावेज और कथित ऑडियो व डिजिटल रिकॉर्डिंग में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम मिलने का दावा किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, रिकॉर्डिंग में फंड ट्रांसफर, बैंक खातों के संचालन और कार्रवाई से बचने के तरीकों पर बातचीत के संकेत मिले हैं। सीबीआई इन रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच भी करा रही है।
सरकार का सख्त संदेश
राज्य सरकार इस मामले को केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला मान रही है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी के निर्देश पर पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और बाद में सीबीआई जांच शुरू कराई गई थी। अब धारा 17-A के तहत मंजूरी देकर सरकार ने संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी।







