Haryana News: हरियाणा सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पॉलिसी में अहम संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में भी इंडस्ट्रियल कॉलोनियां विकसित की जा सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में खुलेंगे उद्योगों के नए रास्ते
संशोधित पॉलिसी के अनुसार अब प्रकाशित डेवलपमेंट प्लान के तहत इंडस्ट्रियल जोन के अलावा ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में भी औद्योगिक कॉलोनियों की स्थापना की अनुमति दी जाएगी। हालांकि यह अनुमति कुल नियोजित क्षेत्र के 25 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगी।
सरकार के अनुसार इस फैसले से उद्योगों के विस्तार को नई दिशा मिलेगी और निवेशकों को अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
उद्योगों के लिए सकारात्मक माहौल बनाने पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार लगातार औद्योगिक निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। आसान नियमों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाकर निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार हरियाणा को बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
एग्रीकल्चर जोन में इंडस्ट्रियल लाइसेंस पर लागू होगा नया नियम
पॉलिसी में एग्रीकल्चर जोन को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। यदि कोई इंडस्ट्रियल लाइसेंस शहरी सीमा से 500 मीटर बाहर एग्रीकल्चर जोन में लिया जाता है, तो वहां जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की लागत संबंधित डेवलपर को उठानी होगी।
इसमें सड़क, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का खर्च शामिल होगा। सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों का आर्थिक बोझ सरकारी खजाने पर कम करना है।
डेवलपर्स को खुद वहन करनी होगी बुनियादी सुविधाओं की लागत
नई व्यवस्था के अनुसार एग्रीकल्चर जोन में उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों को खुद ही आधारभूत ढांचे के विकास पर खर्च करना होगा। इससे योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।
ईडीसी में राहत से पुराने निवेशकों को फायदा
राज्य सरकार ने एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) को लेकर भी निवेशकों को राहत दी है। नई पॉलिसी के मुताबिक यदि एग्रीकल्चर जोन में लिया गया इंडस्ट्रियल लाइसेंस बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाता है और वहां निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, तो उस हिस्से पर ईडीसी नहीं लिया जाएगा।
हालांकि, जिन हिस्सों में निर्माण कार्य अधूरा रहेगा, वहां नियमों के अनुसार ईडीसी देना अनिवार्य होगा।
2015 की इंडस्ट्रियल पॉलिसी में किया गया संशोधन
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2015 में इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पॉलिसी लागू की थी। हाल ही में 24 मार्च को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इसमें संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने संशोधित पॉलिसी का परिपत्र जारी किया।
हरियाणा को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि नई पॉलिसी से उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होगी। ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन को शामिल करने से औद्योगिक विस्तार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।









