चंडीगढ़, 3 जून- हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरे विश्व के समक्ष एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा से लेकर विश्व के विभिन्न देश इस समस्या के वैज्ञानिक समाधान तलाशने के लिए निरंतर शोध एवं नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने प्रदेश को जलवायु-अनुकूल एवं पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल करते हुए वर्ष 2026-27 के बजट में 100 करोड़ रुपये के सीड प्रावधान के साथ “हरियाणा ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड” स्थापित करने की घोषणा की है।
राव नरबीर सिंह ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को गुरुग्राम में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया जाएगा समारोह के दौरान पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राज्य सरकार की विभिन्न पहलों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।
राव नरबीर सिंह ने बताया कि इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का थीम ‘प्राकृति से प्रेरित-जलवायु के लिए-हमारे भविष्य के लिए’ निर्धारित किया गया है। यह थीम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं पुनर्बहाली, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, सतत जीवनशैली अपनाने तथा सुरक्षित भविष्य के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित 100 करोड़ रुपये का ग्रीन क्लाइमेट फंड हरियाणा में शून्य-उत्सर्जन वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, शहरी हरितीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि तथा प्रकृति-आधारित समाधानों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से वायु एवं जल प्रदूषण की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार आधारित निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।
वन एवं पर्यावरण मंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार ने प्रदेश से होकर गुजरने वाली 313 किलोमीटर लंबी यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए विशेष मिशन मोड में कार्य करने की पहल की है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में संचालित होने वाले इस मिशन के अंतर्गत मल-जल शोधन क्षमता में वृद्धि, अनियंत्रित अपशिष्ट प्रवाह पर रोक, औद्योगिक इकाइयों की रियल टाइम निगरानी, नदी तटों का संरक्षण, हरित पट्टी विकास तथा भू-जल पुनर्भरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे।उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के दौरान यमुना में गिरने वाले सभी नालों के जल का वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे नदी को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन पहलों से हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी तथा प्रदेश सतत, समावेशी एवं हरित विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ेगा। साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचने की अपील की।







