IAS Success Story: उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली कृतिका मिश्रा आज उन युवाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं, जो हिंदी माध्यम से UPSC की तैयारी करते हैं। उन्होंने वर्ष 2022 की सिविल सेवा परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 66 हासिल की और अपने दूसरे प्रयास में IAS बनने का सपना पूरा किया।
बिहार कैडर में निभा रहीं जिम्मेदारी
कृतिका मिश्रा वर्तमान में पटना सदर में SDO के रूप में कार्यरत हैं। अपने प्रशासनिक कार्यों के जरिए वह जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की दिशा में काम कर रही हैं।

साधारण परिवार, बड़े सपने
कृतिका एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता दिवाकर मिश्रा एक स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि मां एलआईसी में कार्यरत हैं। परिवार में शिक्षा और साहित्य का माहौल रहा, जिसने उनकी सोच और व्यक्तित्व को मजबूत बनाया।
हिंदी साहित्य से जुड़ा रहा शैक्षणिक सफर
उन्होंने पंडित पृथ्वी नाथ कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया। उनके नाना डॉ. ओम प्रकाश शुक्ला ब्रज और अवधी में लेखन करते हैं, जबकि उनकी मां को भी हिंदी साहित्य में गहरी रुचि है।

पहले प्रयास में मिली असफलता, दूसरे में सफलता
कृतिका ने अपने पहले प्रयास में प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन इंटरव्यू में सफलता नहीं मिली। उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में बेहतर तैयारी के साथ एग्जाम दिया, जहां उन्होंने AIR 66 हासिल कर इतिहास रच दिया।

प्रेरणा के स्रोत
कृतिका मिश्रा स्वामी विवेकानंद और एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती हैं। उनका कहना है कि सिविल सेवा एक ऐसा मंच है, जहां से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए प्रेरणा
कृतिका की सफलता यह साबित करती है कि भाषा कभी बाधा नहीं बनती, यदि मेहनत और रणनीति सही हो। उन्होंने हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए एक मजबूत उदाहरण पेश किया है।











