Viral Video: सामने से आ रही थी ट्रेन के सामने ट्रैक पर गिरा नेत्रहीन मां के साथ चल रहा बच्चा, वीडियो में देखिए कैसे पीछे से आया मसीहा

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कुंदन सिंह, नई दिल्ली: जाको राखे साइयां मार सके ना कोई, ये कहावत एकबार फिर सच साबित हुई है. पूरा मामला मुंबई से सटे बदलापुर के वांगनी स्टेशन की है. यहां एक बच्चा अपने नेत्रहीन मां से प्लेटफॉर्म नंबर 2 साथ चल रहा था. तभी उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो रेलवे टैक पर गिर गया. इस दौरान उसी ट्रैक पर तेजी से एक सुपरफास्ट ट्रेन आ रही थी. बच्चे के सामने मौत नजर आ रहा था और लाचार नेत्रहीन मां को कुछ समझ में नहीं रहा था. वह छटपटा रही थी, लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी. तभी एक शख्स देवदूत यानी मसीहा बनकर आया और बच्चे को किसी तरह बचा लिया. 

बच्चे के सामने मौत खड़ी थी, ट्रेन कुछ मीटर की दूरी तभी तेज दौड़ लगाता एक शख्स आता है और अपनी जान की परवाह किए बगैर बच्चे को बचा लेता है. पूरा मामले प्लेटफॉर्म पर लगे सीसीटीवी में कैद हो गई. 

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बच्चा रेलवे ट्रैक पर गिरा और ऐन वक्त पर पास ही मौजूद पॉइंटमैन मयूर शेलके ने अपनी जान की परवाह किए जांबाजी दिखाते हुए बच्चे को बचा लिया. इस घटना का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है और मयूर शेलके की तारीफ की जा रही है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्वीट कर मयूर शेलके की तारीफ की है.

पूरा घटना 17 अप्रैल के शाम पांच बजे की है. प्लेटफार्म पर लगे CCTV कैमरे में कैद में एक लड़का चलते हुए पटरियों पर गिरता हुआ नजर आ रहा है. उसके गिरने के बाद बच्चे की मां वहीं बैठकर चिल्लाने लगती है. इस बीच पॉइंट्समैन मयूर शेलके उनकी आवाज सुनकर मदद को आता है. मयूर शिल्के चंद सेंकेडों के भीतर बच्चे तक पहुंचता है और महज 3 सेकेंड के भीतर तेजी से बच्चे को उठाकर प्लेटफॉर्म पर रखता औैर खुद भी फुर्ती से प्लेटफॉर्म पर आ जाता है. मयूर शिलके और ट्रेन के बीच महज 2 सेकेंड का ही अंतर था. यदि मयूर शिलके ने उस वक्त जांबाजी नहीं दिखाया होता तो वहां कुछ भी हो सकता था.

मयूर की बहादुरी को देखते हुए अब हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है. शेलके के इस साहस भरे कार्य पर रेलवे को भी नाज है. सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि शेलके रेलवे फील्ड वर्कर हैं जिनका काम यह देखना होता है कि ट्रेन सिग्नल सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं. हमें खुशी है कि शेलके ने नेत्रहीन मां की आवाज सुनी और उसके बच्चे को बचाया.

शेलके का कहना है कि ड्यूटी पर थे बच्चे को देखा और दौड़ पड़े. बच्चे को ऊपर किया और जैसे तैसे चंद सेकेंड में खुद प्लेटफार्म तक आ सके.



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