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Tokyo Olympics 2020: मां का दिया खास तोहफा बना मीराबाई के लिए गुडलक, भावुक कर देने वाली है कहानी

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नई दिल्ली: वेटलिफ्टर मीराबाई चानू  (Mirabai Chanu) ने टोक्यो ओलंपिक्स में भारत के लिए बेहतरीन शुरूआत की है. 36 साल की चानू ने कुल 202 किग्रा वजन उठाकर किर्तीमान रच दिया. इस शानदार प्रदर्शन के बूते उन्होंने सिल्वर मेडल पर भारत की दावेदारी पुख्ता कर दी.

लेकिन मीराबाई के प्रदर्शन के अलावा जिस एक चीज ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा, वह थीं उनके कानों में पहनी हुई बालियां. ये कोई आम बालियां नहीं हैं. यदि आप चानू की तस्वीरों को गौर से देखेंगे तो जानेंगे कि उनकी बालियों की आकृति ओलपिंक के छल्लों के जैसी है.

आकृति ही नहीं, बल्कि इन बालियों की कहानी भी ज्यादा बेहद खूबसूरत है. दरअसल ये बालियां चानू को उनकी मां तोम्बी लीमा ने 2016 के रियो ओलंपिक से पहले तोहफे में दी थीं. घर की माली हालात ठीक ना होने की वजह से उन्हें इन बालियों के लिए अपने गहने बेचने पड़ गए थे.

लीमा को उम्मीद थी कि ये बालियां उनकी बेटी के लिए अच्छा भाग्य लाने वाली साबित होंगी. लेकिन रियो ओलंपिक में मीराबाई चानू डिसक्वालिफाई हो गईं. जाहिर तौर पर मीराबाई की मां को इस बात से गहरा धक्का लगा था. लेकिन चानू ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार अभ्यास में जुटी रहीं. और अब उन्होंने सिल्वर मैडल जीतकर पूरी दुनिया में ना सिर्फ भारत बल्कि अपनी मां का भी नाम रोशन कर दिया है.

स्थानीय मीडिया की मानें तो तोम्बी लीमा ने जब मीरा के कानों में अपनी दी बालियां देखीं तो वे खुशी से रो पड़ीं थीं. मीडिया से हुई बातचीत में लीमा ने कहा कि मैंने टीवी पर मीरा को बालियां पहने देखा और मैं खुशी से रो पड़ी. तोम्बी लीमा के मुताबिक उन्हें और पूरे परिवार को उम्मीद थी मीराबाई इस बार कोई ना कोई पदक भारत के लिए जरूर जीतेंगी.

मणिपुर की राजधानी इंफाल से 25 किमी दूर मीराबाई के नोंगपोक काकचिंग गांव में मीराबाई को टोक्यो में इतिहास रचते हुए देखने के लिए उनके घर में कई रिश्तेदार और दोस्त भी मौजूद थे. मीरा ने भी सिल्वर जीतने के बाद अपनी मां को याद किया. उन्होंने कहा कि मां के त्याग की वजह से ही मैं सफल हो पाई हूं.



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