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अन्ना हजारे को मनाने की कवायद तेज, केंद्र के खिलाफ 30 जनवरी से किया है आमरण अनशन का ऐलान

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अमित कुमार, नई दिल्ली : कृषि कानून के खिलाफ किसानों की पिछले 64 दिनों से जारी आंदोलन के बीच सरकार के खिलाफ 30 जनवरी से समाजसेवी अन्ना हजारे आमरण अनशन शुरू करने जा रहे है. अन्ना हजारे का कहना है कि वो 2018 से सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की सरकार से मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है. लिहाजा उन्हें विवश होकर आमरण अनशन के लिए मजबूर होना पर रहा है. अन्ना हजार अपना ये अनशन अपने गांव रालेगण सिद्धि के यादव बाबा मंदिर में करने जा रहे हैं.

इस बीच सरकार की ओर से अन्ना हजारे को मनाने की कोशिशें तेज हो गई है. जानकारी के मुताबिक अन्ना को अनशन से रोकने के लिए आज केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी रालेगण सिद्धि जाएंगे. जानकारी के मुताबिक दिल्ली में देवेंद्र फडवणीस और गिरीश महाजन ने कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से बात कर एक ट्राफ्ट आज अन्ना हजार को दिया है. अन्ना उसमें कमियां निकालकर कृषि मंत्री तोमर को वापस भेजेंगे. बताया जा रहा है कि अगर केंद्र सरकार अन्ना हजारे के सुझावों से पर अपनी समहति देती है तो वो अपना प्रस्तावित अनशन रोक सकते हैं.

आपको बता दें कि अन्ना हजारो को मनाने के लिए पिछले दिनों महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हरीभाऊ बागडे, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत बीजेपी नेता राधाकृष्ण विखे पाटील, अहमदनगर के सांसद सुजय विखेपाटील समेत कई नेता रालेगण सिद्धि जा चुके हैं. लेकिन अन्ना अपने अनशन पर अड़े हुए हैं. अन्ना हजारे अन्ना स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें और एमएसपी लागू करने की मांग पर अड़े हैं.

इस बीच अन्ना हजारे ने गणतंत्र दिवस पर दिल्‍ली में हुई हिंसा पर जताया दुख है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि आंदोलन में किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘मैं हमेशा अहिंसात्मक और शांतिपूर्ण आंदोलन चाहता हूं. मैंने पिछले 40 सालों में उन्‍होंने कई बार आंदोलन किया है. लोकपाल आंदोलन में लाखों की संख्‍या में लोग शामिल होते थे लेकिन किसी ने एक पत्‍थर भी नहीं उठाया. गांधी जी ने हमें सिखाया है कि शांति किसी भी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत होती है.’ 

स्वामीनाथन आयोग की बड़ी बातें

स्वामीनाथन आयोग की अपनी सिफारिशों में कृषिमूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के साथ-साथ स्वायत्तता देने की वकालत की है. इसके साथ ही आयोग ने कृषि उपज को लागत मूल्य पर 50 फीसदी से बढ़ाकर सी-2 में 50 फीसदी मिलाकर एमएसपी देने के लिए उच्चाधिकार समिति के गठन की बात की है. आपको बता दें कि 29 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इन मांगों को मानने के लिए उच्चाधिकार समिति गठित करने का लिखित आश्वासन दिया गया था.

 



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