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राजस्थान विधानसभा उपचुनाव: सर्वे के जरिये जनता की नब्ज टटोलकर प्रत्याशी उतारने की कवायद

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के जे श्रीवत्सन, जयपुर: राजस्थान की तीन विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनावों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों में ही अपनी-अपनी रणनीति तय करनी शुरू कर दी है. हालांकि दोनों ही दलों के लिए यहां प्रत्याशियों का चयन सबसे बड़ी परेशानी के रूप में सामने है. राजसमन्द, सुजानगढ़ और सहाडा में यहां के विधायकों के आकस्मिक निधन के कारण अब 17 अप्रेल को विधानसभा के उपचुनाव होने हैं,  जिसके लिए दोनों ही दलों ने जतना की नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है.

कांग्रेस की ओर से रणनीति को जांचने परखने सोमवार को जयपुर में खुद पार्टी के राजस्थान प्रभारी अजय माकन आए. उन्होंने इन तीनों ही विधानसभा क्षेत्रों के लिए बनाई चुनाव समिति के पदाधिकारियों से ग्राउंड जीरो की जानकारी ली और तैयारियों की समीक्षा समझी. बाकायदा इन तीनों ही जगह के लिए उन्होंने बूथ लेवल पर मेनेजमेंट की जानकारी मांगी. 

हालांकि सहाडा विधानसभा के प्रतिनिधियों ने ही इसकी पूरी जानकारी दी, लेकिन बाकी तैयारियों से वे इस कदर संतुष्ट नजर आए कि उन्होंने प्रत्याशियों के नामों की पैनल लिस्ट आलाकमान को भिजवाने का निर्देश जारी कर दिया, ताकि समय रहते प्रत्याशी के नाम को लेकर फैसला लिया जा सके. 

यही नहीं चुनावों की तारीख के ऐलान के साथ ही राजस्थान कांग्रेस मुख्यालय में उपचुनावों को लेकर एक कंट्रोल रूम भी बना दिया गया है और हर रोज की फीडबैक के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रणनीति बनाई जा रही है. तय किया गया है कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के सवा दो साल के कामकाज को लेकर पार्टी जनता के बीच जाएगी. वैसे हाल ही में राजस्थान सरकार ने इन तीनों की जगहों के लिए कई नई योजनाओं का भी ऐलान किया है. उनके बारे में भी बताकर वोट मांगा जाएगा. 

हालांकि यहां भी तीन सीटों के लिए अनगिनत दावेदार हैं और पार्टी नेताओं के जरिए लोग टिकट लेने की जी तोड़ कोशिश में लगे हैं. वहीं दूसरी तरह बीजेपी में इन तीनों की क्षेत्रों को लेकर कुछ गफलत का माहौल बना हुआ है. हालांकि पार्टी के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह भी जयपुर में ही थे और उन्होंने भी पार्टी के इन तीनों क्षेत्रों के चुनाव प्रबंधन को लेकर चर्चा की, लेकिन कहा जा रहा है कि गुटबाजी अभी उनके लिए परेशानी का बड़ा कारण है. 

शायद यही कारण है कि वे खुद भी इन तीनों ही क्षेत्रों का दौरा करके वहां की जमीनी हकीकत का जायजा लेकर आ गए हैं. इसी के लिए पार्टी एक सर्वे करवा रही है, जिसके आधार पर प्रत्याशी का चेहरा तलाशा जाएगा. पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में होने वाला यह पहला विधानसभा का उपचुनाव है, ऐसे में वे अग्निपरीक्षा समझे जाने वाले इन चुनावों के अपने होमवर्क में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे. 

यहां पर उनकी जरा सी चूक उनके अपने पद के लिए भी खतरा साबित हो सकती है और इस तरह विरोधी गुट जबरदस्त हावी हो जाएगा. जबकि यहां धमाकेदार जीत उनकी स्थिति को और मजबूत कर विरोधियों की हवा निकलने के लिए काफी है. 

शायद यही कारण है कि सभी विरोधों को दबाकर वे सर्वमान्य प्रत्याशी को मैदान में उतारने के लिए सर्वे का सहारा ले रहे हैं. राजसमन्द सीट को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. यहां से सांसद दीया कुमारी अपने किसी चहेते को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं. वहीं साल 2018 में यहाँ से चुनाव जीतने वाली किरण महेश्वरी की बेटी दीप्ती महेश्वरी यहां से चेहरा बनने की कोशिश में हैं. 

इसी इलाके के पूर्व सांसद स्वर्गीय हरिओम सिंह राठौड़ के बेटे कर्णवीर सिंह राठौड़ भी पिता की विरासत को संभालने राजनीती में किस्मत आजमाना चाह रहे हैं. दलित बाहुल इलाके सुजानगढ़ सीट से बीजेपी इस बार भी मेघवाल पर ही दाव खेलने का मन बना रही है. यहां संतोष मेघवाल पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल और बीएल भाटी दावेदार हैं. इस इलाके के ज्यादातर नेता वसुंधरा राजे के समर्थक माने जाते हैं ऐसे में खुद वसुंधरा राजे भी अपने किसी चहेते को ही टिकेट दिलाने की पूरी कोशिश में है. 

तीसरी सीट सहाडा की है, यहां बीजेपी अपनी ही पार्टी के दो बागी या दो भाईयों में से किसी को टिकट दे सकती है. दो भाई रतनलाल जाट और बाबूलाल जाट टिकेट के लिए ऐढ़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं और दोनों में से एक की भी नाराजगी पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. फिलहाल 30 मार्च नामांकन पर्चा जमा कराने की अंतिम तिथि है और माथापच्ची प्रत्याशियों के चयन को लेकर है. एक बार नाम सामने आने के बाद ही दोनों ही दल अपनी अपनी चुनाव रणनीति को लेकर सामने आएंगे. 



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