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इस बड़े नेता के बेटे को मिला विधानसभा का टिकट, पिता की तरह दादा भी थे पार्टी प्रमुख, विपक्ष ने बोला बड़ा हमला

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नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में वंशवाद आज की बात नहीं है. इस समय भारत में शायद ही ऐसी कोई पार्टी हो जिसने वंशवाद को बढ़ावा न दिया हो. ऐसा होने पर किसी बड़े नेता के करीबी रिश्तेदार को पार्टी का टिकट मिल जाता है, और विपक्षी दलों को उसे घेरने का मौका. ऐसा ही एक मामला तमिलनाडु से भी सामने आया है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी ने शनिवार को डीएमके पर वंशवाद को लेकर निशाना साधा है. पलानीस्वामी ने कहा है कि डीएमके वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा दे रही है. मुख्यमंत्री ने बयान में आगे कहा कि अगर डीएमके सत्ता में आती है तो यह परिवार शक्तिकेंद्र बन जाएगा. वंशवाद को बढ़ावा देकर कुछ नहीं होगा, लोगों के लिए काम करके साबित करना होगा कि वह मुख्यमंत्री पद के हकदार है भी या नहीं. पलानीस्वामी ने कहा कि वह डीएमके की वंशवाद की राजनीति को खत्म करेंगे.”

आप को बता दें कि डीएमके ने 6 अप्रैल को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए 173 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी, जिसमें चेपॉक विधानसभा सीट से पार्टी प्रमुख एम के स्टालिन के बेटे उदयगिरी का भी नाम शामिल था. चूंकि उदयगिरी के  पिता एमके स्टालिन इस समय पार्टी प्रमुख हैं, इसलिए मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने हालिया बयान में डीएमके पर वंशवाद का आरोप लगाया. बता दें कि स्टालिन से पहले उनके पिता करुणानिधि ने डीएमके प्रमुख पद की जिम्मेदारी लंबे समय तक संभाली थी.

डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम) 2011 से तमिलनाडु में सत्ता से बाहर है और सरकार में वापस आने के लिए एड़ी-चोटी लगाए हुए है. इकलौते चरण के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके का सीधा मुकाबला एआईएडीएमके के साथ होगा. जहां, एआईएडीएमके इस बार बीजेपी के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेगी, वहीं डीएमके ने इस चुनाव में कांग्रेस का हाथ थामा है.



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