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पुतिन के खौफनाक प्लान का खुला भेद, दुनिया हैरान

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नई दिल्‍ली: ना एटम बम दगेगा, ना मिसाइल चलेगी, ना युद्ध होगा बावजूद इसके नए साल में दुनिया तबाह हो सकती है. रूस बहुत ही सीक्रेट तरीके से महाविनाश के इसी मिशन पर काम कर रहा है. पुतिन की लैब में एक ऐसा डेडली बवंडर तैयार किया जा रहा है, जो किसी भी देश का नामोनिशान मिटा सकता है. लेकिन पुतिन का ये भेद अब खुल गया है.

पुतिन अब न मिसाइल दागेंगे, न फाइटर जैट से बम बरसाएंगे, जंग के मैदान में न रूसी टैंक गरजेंगे और न ही पुतिन की आर्मी दुश्मन पर सीधा हमला करेगी, फिर भी दुनिया में तबाही आएगी. पुतिन ने दुनिया को हिलाने का ऐसा खौफनाक प्लान तैयार किया है, जिसमें अमेरिका और चीन बहुत पीछे छूट गए हैं.

व्लादिमिर का ‘डेडली वायरस’

रूस की लैब में पुतिन के वैज्ञानिक दिन-रात शोध में जुटे है. लैब में एक ऐसी रिसर्च चल रही है, जिससे इबोला और सबसे खतरनाक वायरस मारबर्ग को डेडली बनाया जा सके. सीधी भाषा में कहें तो रूस जैविक हथियारों की एक ऐसी फौज खड़ी कर रहा है, जिसका वार बेहद घातक होगा. इतना घातक की दुश्मन को दम तोड़ने में सिर्फ चंद सेकेंड लगेंगे.

रूस की खुफिया एजेंसी FSB की एक यूनिट ‘ऑपरेशन 68240’ पर काम कर रही है. पुतिन ने इसे ‘टोलेडो’ कोड नेम दिया है. इस ऑपरेशन के तहत रूस की लैब में खतरनाक जैविक हथियार तैयार किए जा रहे हैं. लैब में दुनिया के दो सबसे घातक वायरस मारबर्ग और इबोला को और डेडली बनाया जा रहा है.

रूस जैविक हथियारों पर सीक्रेट तरीके से काम कर रहा है. रूसी रक्षा मंत्रालय में एक गुप्त यूनिट है, जिसका नाम सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट है जो ‘बेहद घातक’ वायरस पर रिसर्च करती है.

मास्को में 48वीं सेंट्रल रिसर्च यूनिट और 33वीं सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट मिलकर काम करते. 

33वें सेट्रेल रिसर्च इंस्टीट्यूट में ही नर्व एजेंट नोविचोक बनाया है.

इस घातक जहर के जरिए ही पुतिन के विरोधियों पर हमला करने का आरोप है.

हालांकि, अमेरिका ने रूस के दोनों ही संस्थानों पर जैविक हथियारों पर शोध करने के लिए प्रतिबंध लगा रखा है.

48वीं रिसर्च यूनिट अपना पूरा डेटा रूस की खुफिया एजेंसी FSB की यूनिट 68240 को भेजती है, जो टोलेडो कार्यक्रम चला रही है.

पुतिन ने अपने दुश्मनों को नेस्तेनाबूत करने के लिए 33वीं सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट में ही तबाही वाला मिशन लॉन्च किया है. इसी लैब में वैज्ञानिक इबोला और मारबर्ग पर काम कर विनाश का सबसे बड़ा हथियार तैयार कर रहे हैं.

मौत का दूसरा नाम मारबर्ग वायरस:

मारबर्ग दुनिया का सबसे खतरनाक वायरस है.

मारबर्ग रक्तस्रावी बुखार का वायरस है.

मारबर्ग वायरस की वजह से मांसपेशियों में दर्द शुरू हो जाता है.

खाल और शरीर के दूसरे अंगों से खून निकलने लगता है.

90% मामलों में मारबर्ग के शिकार मरीजों की मौत हो जाती है.

दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस मारबर्ग को जानने के बाद दूसरे सबसे खतरनाक वायरस इबोला को जानना भी बेहद जरूरी है.

इबोला वायरस भी इंसान की जान का सबसे बड़ा दुश्मन है.

इबोला के भी 90 फीसदी मरीजों को मौत मिलती है.

इबोला गिनी, सियरा लियोन और लाइबीरिया में कहर बरपाता है.

पुतिन के वैज्ञानिक सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट में इबोला को और डेडली बनाकर कुछ ऐसा करना चाहते है, जिससे मौत का प्रतिशत 90 फीसदी से बढ़कर सीधा 100 फीसदी हो जाए यानि जो भी वायरस से संक्रमित होगा, उसकी मौत की गारंटी रूस को मिल जाएगी.

पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती से दुनिया वाकिफ है. यही वजह है कि पहले चीन ने दुनिया को किलर कोरोना दिया और अब जिनपिंग का दोस्त पुतिन इबोला और मारबर्ग को इतना डेडली बना रहा है कि दुनिया तबाही के कगार पर पहुंच गई है.



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