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1857 की क्रांति ने अंग्रेजों का खजाना खाली कर दिया, फिर इस अंगेज ने की BUDGET की शुरूआत

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नई दिल्ली. देश में आजादी से पहले 1860 में बजट पेश करने की शुरूआत हुई. तब ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन काल था. मंगल पांडे के नेतृत्व में 1857 की क्रांति ने अंगेजों का खजाना खाली कर दिया. सेना पर काफी खर्च हो जाने से ईस्ट इंडिया कंपनी पर उधार बढ़ता जा रहा था. ऐसे में एक अंग्रेज जेम्स विल्सन ने जमा-खर्च के लेखाजोखा को पेश कर आगामी खर्च और मैनेजमेंट का ऐसा खाका तैयार किया जिससे कंपनी घाटे से उबर पाई. 

भारत में पहला बजट वर्ष 1860 में पेश हुआ. ये बजट पेश करने वाले अंगेज जेम्स विलसन थे. उस समय जेम्स वायसराय लॉर्ड कैनिंग की परिषद में वित्त सदस्य थे. इसके अलावा वो इंग्लैंड की संसद में सदस्य, यूके कोषागार के वित्त सचिव व व्यापार बोर्ड में उपाध्यक्ष भी थे. वे 1857 में हुए विद्रोह के 2 साल बाद ही भारत आए थे. 

इस मशहूर बैंक की विल्सन ने डाली नींव :

जेम्स विलसन ने विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्र पर आधारित मैगजीन द इकोनॉमिस्ट और विश्व के मशहूर बैंकों में शुमार स्टैण्डर्ड चार्टर्ड बैंक की भी स्थापना की थी. 

कंपनी को घाटे से उबारने लेकर आए इंनकम टैक्स : 

ईस्ट इंडिया कंपनी को घाटे से उबारने के लिए विल्सन आयकर कानून लेकर आए. उस वक्त जनता में इसे लेकर काफी नाराजगी थी. तब विल्सन ने तर्क दिया था कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों को सुरक्षित माहौल में व्यापार करने का मौका दे रही है. इसके एवज में ये फीस ली जा रही है. 

कोलकाता में ली अंतिम सांस, यही बना है कब्र : 

विलसन के बारे में खास बात ये है कि ये 1857 के बाद कंपनी को घाटे से उबारने आए और आखिरी समय तक भारत में ही रहे. यहीं उनकी मौत हो गई. आज भी कोलकाता के मुलिक बाजार स्थित कब्रिस्तान में इनकी कब्र मौजूद है.



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