लोन मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- नीतिगत मामले में हस्तक्षेप नहीं लेकिन कंपाउंड इंटरेस्ट मंजूर नहीं

News

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ब्याज पर कोई ब्याज, चक्रवृद्धि ब्याज या दंड ब्याज उधारकर्ताओं से नहीं लिया जाएगा, जो भी राशि हो, मोरोटोरियम पीरियड के दौरान और इस तरह की कोई भी राशि यदि पहले से ही चार्ज किया गया है तो वापस कर दिया जाएगा. हालांकि इस मसले पर दायर तमाम याचिकाओं में कि गई अन्य मांगों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह नीतिगत मामला है और अदालत को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

जस्टिस अशोक भूषण कि अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सरकार की लोन मोरोटोरियम पॉलिसी पर दखल देने से इंकार किया. जस्टिस एमआर शाह ने फैसला पढते हुए कहा कि आर्थिक नीति का क्या हो या राहत पैकेज क्या हो. यह सरकार और RBI परामर्श के बाद तय करेगी. आर्थिक नीतिगत मसलो पर सुप्रीम कोर्ट का दखल ठीक नहीं. जज एक्सपर्ट नहीं है, उन्हें आर्थिक मसलों पर बहुत एहतियात के साथ ही दखल देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान बैंक ऋण पर वसूले जा रहे ब्याज पर ब्याज मामले में दखल देने से इंकार किया.

आपको बता दें कि RBI ने कोविड-19 महामारी की वजह से उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए कर्जदारों को टर्म लोन की ईएमआई के भुगतान से छह माह की मोहलत दी थी. आरबीआई ने 1 मार्च, 2020 और 31 मई, 2020 के बीच लोन मोरेटोरियम दी थी, जिसे बाद में 31 अगस्त, 2020 तक बढ़ा दिया गया.

आरबीआई ने सितंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा था कि लोन मोरेटोरियम को 6 महीने से ज्यादा समय के लिए बढ़ाने पर ओवरऑल क्रेडिट डिसिप्लिन खत्म हो सकता और इससे अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. वहीं केंद्र सरकार ने भी इस मामले में अलग से एक हलफनामा दाखिल कर कहा था कि मोरेटोरियम के 6 महीनों के दौरान 2 करोड़ रुपए तक के लोन की EMI पर लगने वाले ब्याज का भार केंद्र उठाएगा.



न्यूज़24 हिन्दी