नयी दिल्ली, 7 मई (एजेंसी)

सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र को कोविड-19 मरीजों के इलाज के वास्ते राज्य के लिए ऑक्सीजन का आवंटन 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1200 मीट्रिक टन करने का निर्देश देने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में शुक्रवार को हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. न्यायालय ने कहा कि कर्नाटक के लोगों को लड़खड़ाते हुए नहीं छोड़ा जा सकता है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने कहा कि 5 मई का हाईकोर्ट का आदेश जांचा-परखा और शक्ति का विवेकपूर्ण प्रयोग करते हुए दिया गया है. शीर्ष अदालत ने केंद्र की उस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि अगर प्रत्येक हाईकोर्ट ऑक्सीजन आवंटन करने के लिए आदेश पारित करने लगा तो इससे देश के आपूर्ति नेटवर्क के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी. पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसीटर को कहा कि उसने घटनाक्रम का अध्ययन किया है और वह कह सकती है कि यह “कोविड-19 के मामलों की संख्या को संज्ञान में लेने के बाद पूरी तरह से परखा हुआ, विचार किया हुआ और शक्ति का विवेकपूर्ण प्रयाग करते हुए लिया गया फैसला है. हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे.” पीठ ने कहा कि वह व्यापक मुद्दे पर गौर कर रही है और “हम कर्नाटक के नागरिकों को लड़खड़ाते हुए नहीं छोड़ सकते हैं.” केंद्र ने बृहस्पतिवार को अपील दायर कर कहा था कि हाईकोर्ट ने बेंगलुरु शहर में ऑक्सीजन की कथित कमी के आधार पर आदेश पारित किया है और इससे एलएमओ के आपूर्ति नेटवर्क व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और यह व्यवस्था पूरी तरह ढह जाएगी.

 

 


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