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विशेष: पाकिस्तान में सियासी संकट, सेना ने तैयार किया इमरान खान के फेयरवेल का ब्लू प्रिंट!

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News24


LAST UPDATED: Jan. 6, 2021, 5:59 p.m.

संजय गोदियाल, नई दिल्ली. पाकिस्तान में बहुत बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया है. इमरान खान के फेयरवेल के लिए बाजवा की सेना ने ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है. सेना की अब सीधी सेटिंग पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो से हो चुकी है. ढाई साल पहले जब पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार आई थी, तो उनको सीधा-सीधा बाजवा से समर्थन मिला था. दावा किया जा रहा था कि सेना के दखल से ही पाकिस्तान में नियाजी की सरकार बनी थी. तब से लेकर अब तक सेना की सरपरस्थी में मियां खान सरकार चला रहे थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और इमरान खान के दिन फिर चुके हैं. 

क्या बिलावल ने पीडीएम को धोखा दिया ?

इस्लामाबाद से मिल रही सीक्रेट रिपोर्ट के मुताबिक अब बाजवा बिलावल को प्रधानमंत्री बनने के हक में है. साथ ही सेना दूसरे दलों से भी बिलावल को प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन जुटाने में जुटी है. आपको ये तो याद ही होगा जब पीडीएम में शामिल बाकी दलों के सांसद और विधायकों ने तो इस्तीफे दे दिए थे. लेकिन बिलावल की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नुमाइंदों ने ऐसा नहीं किया था. जिससे उसी वक्त इस बात का साफ-साफ इशारा मिल गया था कि बिलावल और बाजवा के बीच इमरान को बाय-बाय करने की डील हो चुकी है. 

अब सवाल ये है कि आखिर सेना इमरान की विदाई क्यों चाहती है? क्योंकि इमरान खान का तख्तापलट करने की कोशिश हो रही है ? सेना की इमरान खान नाराजगी की कई वजह हैं. दरअसल सेना इमरान खान को कठपुतली बनाकर रखना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. साथ ही पाकिस्तान की अवाम में भी इमरान सरकार का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है. इमरान खान न तो अंदरूनी मसलों को सही संभाल पाए और न ही विदेश मामलों को यानी इमरान सरकार में मुल्क ने सिर्फ खोया ही खोया है पाया कुछ भी नहीं. 

इमरान ने मुल्क का बेड़ागर्क कर दिया ?

इमरान सरकार के दौरान पाकिस्तान में महंगाई दर 11 फीसदी हो चुकी है. मुल्क पकर विदेशी कर्ज 110 अरब डॉलर पार कर चुका है. पाकिस्तान के रहनुमा सऊदी अरब से रिश्ते खराब हो चुके हैं. चीन और तुर्की से दोस्ती की वजह से पाकिस्तान अमेरिका और यूरोप के निशाने पर है. इमरान खान आतंक पर लगाम लगाने में भी नाकाम रहे हैं, जिसकी वजह से पाकिस्तान अब भी FATF की ग्रे लिस्ट में है. विपक्ष में रहते हुए इमरान जिन मुद्दों को उठाते थे, अब उन सभी मुद्दों पर मुकर गए हैं. अवाम से लेकर विपक्ष तक सभी इमरान का इस्तीफा मांग रहा है. इसी वजह से इमरान खान को यू टर्न पीएम कहा जा रहा है. 

बिलावल के अलावा कोई विकल्प नहीं ?

इमरान के बाद सेना के सामने बिलावल के अलावा कोई दूसरा विकल्प बचा ही नहीं है, क्य़ोंकि नवाज शरीफ की पार्टी  PML-N खुले तौर पर सेना और ISI का विरोध कर रही है. लिहाजा उन्हें उसी सेना का समर्थन क्यों मिलेगा?

एक तरफ तो बिलावल भुट्टो सेना से सेटिंग करके इमरान की कुर्सी के पैर कमजोर कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वो विपक्ष के गठबंधन पीडीएम के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं. इमरान का इस्तीफा मांग रहे हैं. पीडीएम ने ऐलान किया है कि 31 जनवरी को वो सरकार के खिलाफ इस्लामाबाद मार्च करेगा, जिसमें लाखों लोग शामिल होंगे. पीडीएम इमरान को उसी कंटेनर स्ट्रैटेजी से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, जो उन्होंने तीन साल पहले नवाज शरीफ सरकार गिराने में इस्तेमाल की थी. लेकिन बिलावल की बेवफाई से इमरान के खिलाफ पीडीएम की सियासत भी फेल होती दिखाई दे रही है. 

साफ है सेना ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. बिलावल भी पीडीएम को धोखा देकर, सेना को साथ लेकर सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने का रास्ता बना रहे हैं. ऐसे में आने वाले कुछ दिन पाकिस्तान की सियासत में काफी अहम होने वाले हैं, क्योंकि एक तरफ पीडीएम है और दूसरी तरफ बाजवा-बिलावल ,जो इमरान सरकार गिराने की हर संभव कोशिश में जुटे हैं. ऐसे में देखना ये होगा कि इमरान खान बीच का रास्ता कैसे निकाल पाते हैं. 



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