सरकार की गलत नीति से बंद हो गई स्कॉलरशिप हुई बंद, एक बार रुकने पर दोबारा नहीं मिलती छात्रवृत्ति

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के जे श्रीवत्सन, जयपुर: राजस्थान में हजारों छात्र- छात्राओं के सामने एक अजीब से दुविधा आ गयी है. कोरोनाकाल में परीक्षाएं आयोजित नहीं होने की वजह से मार्क शीट नहीं मिल पायी है, और बिना मार्क शीट के अंकों के प्रतिशत के अब ये विद्यार्थी स्कॉलरशीप और कई सरकारी योजनाओं का लाभ ही नहीं ले पा रहे हैं. चिंता की बात यह है की एक बार छात्रवृत्ति ब्रेक होने के बाद नियमानुसार अब अगले साल से इनमे से किसी भी छात्र- छात्राओं को दौबारा छात्रवृत्ति भी नहीं मिलेगी.

इनमें से कई विद्यार्थी कृषक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं. चूंकि छात्रावास का कुल खर्च 18 हजार रुपए है, जिसमें 12 से 15 हजार खाना खर्चा और शैक्षणिक शुल्क के साथ परीक्षा शुल्क के रूप में 2400 जमा कराने पडते हैं. छात्रवृत्ति न मिलने की वजह से इन विद्यार्थियों के लिए अपने घरों से ये रकम मांगना मुश्किल हो रहा है, और इनकी पढ़ाई संकट में आ गई है.

आप को बता दें कि कोरोनाकाल में बिना परीक्षा लिए स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का फैसला अब राजस्थान के विद्यार्थियों के लिए परेशानी का सबसे बड़ा सबब बना हुवा है. साल 2020 के मार्कशीट की जगह छात्रों- छात्राओं को प्रमोट करने का सर्टिफिकेट दिया गया है. ऐसे में इसे दिखाकर जब ये छात्र- छात्राएं मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना के लिए आन लाईन आवेदन कर रहे हैं तो उनके आवेदन पत्र ही रिजेक्ट हो रहे हैं. क्योंकि किसी भी योजना के लिए प्रमोटेड का सट्रिफिकेट मान्य नहीं है.

सरकारी स्कूल- कॉलेजों में विद्यार्थियों के लिए बनायी गयी सभी योजनाओं और सरकारी छात्रवृत्ति के लिए न्युनतम अंक और प्रतिशत अंक निर्धारित होते हैं. चूंकि प्रमोटेड सर्टिफिकेट में इनका जिक्र ही नहीं होता है तो प्रदेश में करीब 50 हजार से भी ज्यादा कॉलेज छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने में संकट खड़ा हो गया है.

जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना के लिए न्यूनतम 60 फीसदी अंकों की जरुरत होती है, जबकि पोस्ट मैट्रिक स्कूटी योजना के लिए ओबीसी वर्ग के छात्रों को 60 फीसदी अंक होना जरुरी है. इसी तरह देवनारायण स्कूटी योजना के लिए 75 फीसदी अंक, कालीबाई भील  स्कूटी योजना के लिए मार्कशीट और लेबर स्कॉलरशीप के लिए भी निश्चित अंकों का प्रतिशत जरुरी है.इसमें से भी मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना के लिए यह नियम भी है की यदि एक बार किसी विद्यार्थी की छात्रवृत्ति ब्रेक हो जाती है तो उसे आगे कभी भी इस योजना का पत्र नहीं माना जाएगा. कॉलेज प्रशासन के साथ-साथ अब सरकार भी इन नियमों को लेकर हैरान परेशान है.



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