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सचिन वाजे ने जबरन वसूली के लिए महाराष्ट्र के शीर्ष मंत्रियों को ठहराया दोषी

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नई दिल्‍ली: मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने बुधवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के शीर्ष मंत्रियों ने उन्हें व्यापारियों और प्रतिष्ठानों से पैसा लाने के लिए कहा था. वाजे का यह आरोप मुंबई के पूर्व कमिश्‍नर परम बीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की तरह है, जिसकी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है. हालांकि महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार ने सभी आरोपों से सिरे से खाजिर किया है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) वर्तमान में फरवरी में अरबपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर एक कार में विस्फोटक लगाने और मार्च में ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या केस में वाजे को गिरफ्तार करके जांच कर रही है. पेशी के दौरान सचिन वझे ने अदालत के सामने एक लिखित बयान दिया है. यह बयान उसने NIA की कस्टडी के दौरान दिया था. इसमें सचिन वझे ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के साथ ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर अनिल परब पर भी अवैध वसूली के लिए कहने का आरोप लगाया है.

बयान में वझे ने यह भी कहा है कि वसूली कांड की पूरी जानकारी अनिल देशमुख के PA को थी. सचिन वाजे का कहना है कि अनिल परब ने 50 लिस्टेड कंपनियों में से हर कंपनी से 2 करोड़ रुपए लेने के लिए कहा था.

परिवहन मंत्री अनिल परब ने वाजे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी जबरन वसूली मामले में शामिल नहीं थे और यह बीजेपी की महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार को बदनाम करने की साजिश थी. पारब ने कहा, “मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) को बदनाम करने के लिए, मुख्यमंत्री के किसी करीबी को उकसाना जरूरी था और यह बीजेपी द्वारा चलाया जा रहा एजेंडा का हिस्सा है.”

उन्‍होंने कहा, “मैं किसी भी एजेंसी द्वारा जांच के लिए तैयार हूं कि क्या एनआईए, रॉ या कोई भी. मैं नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हूं. अगर मैं दोषी पाया गया तो प्रमुख उद्धव ठाकरे मुझे फांसी पर लटका दें.” उन्होंने कहा कि वह कानूनी रूप से इस केस को लड़ेंगे.

उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है, क्योंकि राज्य के बीजेपी प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया था कि तीसरे मंत्री जल्द ही कटघरे में होंगे, क्योंकि उन्हें इस पत्र का पहले से पता था.

अपने चार पन्नों के पत्र में वाजे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और मौजूदा परिवहन मंत्री अनिल परब ने उनसे पैसे इकट्ठा करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के करीबी होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति द्वारा उनस पैसे के लिए संपर्क किया गया था.

देशमुख और अजीत पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के हैं, जबकि परब शिवसेना के सदस्य हैं. राज्य की गठबंधन सरकार में कांग्रेस तीसरे भागीदार है.

25 मार्च को वाजे ने अदालत से अनुरोध किया कि उसे मामले के संबंध में कुछ कहने की अनुमति दी जाए. अदालत ने उसे लिखित रूप में अपना सबमिशन करने के लिए कहा. जब वह बुधवार को पत्र लाया, तो अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

वाजे के वकील ने कहा, “हमने अदालत को पत्र सौंपा, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और हमें सही प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा. प्रक्रिया के तहत वह एक गोपनीय बयान देंगे या आपराधिक प्रक्रिया संहिता (मजिस्ट्रेट के सामने बयान) की धारा 164 के तहत एक बयान देंगे, जिसे हम करने के लिए तैयार नहीं हैं.”



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