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Republic Day 2021: एक जैसा नहीं होता है 26 जनवरी और 15 अगस्त का आयोजन, जानिए क्या हैं बड़े अंतर

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15 अगस्त और 26 जनवरी, ये दोनों ही तारीखें हम भारतीयों के लिए बहुत अहम हैं. इनमें से एक दिन हमारे देश को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली थी, जबकि दूसरे दिन हमने संविधान को अपनाया था और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने का गौरव मिला था. लेकिन आज भी हम में से कई इस बात को शायद नहीं जानते हैं कि इन दोनों महत्वपूर्ण दिनों पर होने वाले आयोजनों में बड़ा अंतर होता है.

1- स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस के आयोजन में सबसे बड़ा अंतर इस बात का होता है कि 15 अगस्त को ध्वजारोहण होता है, जबकि 26 जनवरी को ध्वज फहराया जाता है. एक जैसी लगने वाली ये क्रियाएं असल में एक-दूसरे से बहुत अलग हैं. ध्वजारोहण उसे कहते हैं जब बंधे हुए ध्वज को पोल पर नीचे से ऊपर खींचा जाता है और फिर उसे फहराया जाता है. जबकि 26 जनवरी को ध्वज पोल पर ऊपर बंधा रहता है और उसे वैसे ही खोल दिया जाता है. दरअसल,  15 अगस्त को ब्रितानी झंडा नीचे उतरा था और हमारे तिरंगे को ऊपर चढ़ाया गया था. तभी से इस रस्म को निभाया जा रहा है.

2- 15 अगस्त के कार्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं, जबकि 26 जनवरी को राष्ट्रपति. इसका कारण ये है कि देश 1947 में ही आजाद हो गया था. प्रधानमंत्री देश के राजनीतिक प्रमुख होते हैं जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख. 1947 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की शक्ल में हमारे पास प्रधानमंत्री तो थे, लेकिन तब राष्ट्रपति का चयन नहीं हो पाया था. बतौर राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने पहली बार 26 जनवरी 1950 को झंडा फहराया था.

3- स्वाधीनता दिवस के कार्यक्रम का आयोजन लाल किले पर होता है, जबकि गणतंत्र दिवस वाले दिन राजपथ पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.



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