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राकेश टिकैत बोले- गाजीपुर बॉर्डर हमारे गांवों की तरह, लॉकडाउन और कर्फ्यू में भी यहीं रहेंगे

(प्रभाकर मिश्रा) गाजियाबाद: यूपी गेट (गाजीपुर बार्डर) पर चल रहे किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत शुक्रवार को आंदोलन स्थल पर मॉस्क बांटते नजर आए. भाकियू की टोपी की ही तरह सफेद रंग के मास्क के चारों ओर हरे रंग की पट्टी भी लगी हुई है. 

राकेश टिकैत ने किसान साथियों को इसे लगाने का तरीका भी बताया. उन्होंने कहा कि इस मास्क को धोकर इस्तेमाल किया जा सकता है. इतना ही नहीं उन्होंने आंदोलनकारी किसानों से शारीरिक दूरी का पालन करने की भी अपील की और बाकायदा इसका फार्मूला भी समझाया. 

टिकैत ने कहा अपने दोनों हाथ फैलाकर दूसरे से टच हुए बिना अच्छी तरह से घूम सको तो आप एक -दूसरे से सुरक्षित दूरी पर हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली के बाॅर्डर अब किसानों के गांव ही हो गए हैं. कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है. हम अपने इन गांवों में कोविड गाइडलाइन का पालन करेंगे. 

सरकार जब बात करेगी, तब करेगी, फिलहाल हमें आंदोलन स्थलों पर कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए रहना है. शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के दौरे से लौटकर गाजीपुर बार्डर पहुंचे राकेश टिकैत ने किसानों से गेहूं की फसल कटाई और गन्ने की स्थिति की भी जानकारी ली और किसानों को कहा कि अपने खेतों का काम न बिगड़ने दें. 

समय से फसल का काम निपटाने के साथ ही आंदोलन स्थलों पर नजर रखें. भारतीय किसान यूनियन (युवा) के अध्यक्ष गौरव टिकैत ने भी आंदोलन स्थल पर मास्क वितरित किए और सभी से आग्रह किया कि मास्क लगाकर ही रहें. भाकियू के राष्ट्रीय प्रेस प्रभारी शमशेर राणा ने बताया कि शुक्रवार को आंदोलन स्थल पर करीब सात हजार मास्क वितरित किए गए.  

हालांकि अभी तक आंदोलन के दौरान कोरोना संक्रमण का एक भी केस सामने नहीं आया है, फिर भी राकेश टिकैत की अपील पर सभी ने अपने गांव देहात की तरह आंदोलन स्थल पर भी मास्क का इस्तेमाल करने का आश्वासन दिया. राकेश टिकैत ने कहा कि देश में कोरोना फिर पैर पसार रहा है. हमें स्वास्थ्य संबंधी गाइडलाईन का पालन करना अति आवश्यक है. 

सावधानी में ही सुरक्षा है. अतः आप सभी मास्क लगाकर रखें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें. हालांकि उन्होंने कहा कि कोरोना कितना भी भयावह रूप ले ले, लेकिन तीनों कृषि कानूनों की वापसी तक हम बॉर्डर खाली करके नहीं जायेंगे.  हम यहां दिल्ली के चारो तरफ आंदोलन में जितने भी किसान हैं उनके लिए हर बॉर्डर अपना गांव हैं और कोई अपना गांव छोड़कर नहीं जाता है. 

जिस तरह देश में गांव देहात में कोरोना से जंग लड़ी जा रही है. उसी तरह हम आंदोलन स्थलों पर अपने गांव जैसे माहौल में कोरोना को फटकने नहीं देंगे. टिकैत ने कहा कि हम आंदोलन को छोड़कर जाने वाले नहीं है. हमने वैक्सीन लगानी शुरू कर दी है. जिसमें शासन-प्रशासन सहयोग कर रहा है. 



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