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कवि और सामाजिक‍ कार्यकर्ता वरवरा राव को भीमा कोरेगांव मामले में मिली जमानत

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मुंबई: कोरेगांव-भीमा मामले में दो साल से अधिक समय से जेल में बंद 81 वर्षीय कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वरवारा राव को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने चिकित्सा आधार पर छह महीने के लिए जमानत दी है.

वर्तमान में उनका मुंबई के नानावती अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहां हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनको भर्ती कराया गया था. राव को अदालत ने कहा है कि वे मुंबई में रहें और जब भी जरूरत हो जांच के लिए उपलब्ध हों.

इस महीने की शुरुआत में उनकी वकील इंदिरा जयसिंह ने बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति पर प्रकाश डाला. उन्‍होंने कहा कि पिछले फरवरी से 365 दिनों में, उन्होंने 149 दिन अस्पताल में बिताए. उन्होंने अदालत से राव को महाराष्ट्र की तलोजा जेल से बाहर निकालने का आग्रह किया, जहां उन्हें एक अंडर ट्रायल कैदी के रूप में रखा गया था और उन्हें घर जाने व हैदराबाद में अपने परिवार के साथ रहने की अनुमति दी देने की मांग की थी.

इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की जा रही है, जिसमें 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गर परिषद के सम्मेलन में भड़काऊ भाषण देने के आरोप शामिल हैं. जिसके बारे में पुलिस ने दावा किया कि कोरेगांव-भीमा युद्ध शहीद स्मारक के अगले दिन हिंसा हुई.

वरवारा राव और नौ अन्य कार्यकर्ताओं पर माओवादियों के साथ हिंसा की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था. राव ने क्रांतिकारी लेखकों के संघ “वीरसम” का नेतृत्व किया था. हालांकि उन्‍होंने इस आरोप का दृढ़ता से खंडन किया है.



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