Param Bir Singh Letter Controversy: बीजेपी ने पूछा- किसके आदेश से हुई वाजे की बहाली, रविशंकर प्रसाद ने शरद पवार की भूमिका पर भी उठाए सवाल

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नई दिल्ली: मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की चिट्ठी के बाद महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हो गई. परमबीर सिंह द्वारा यह आरोप लगाने के बाद कि अनिल देशमुख, पुलिस अधिकारियों को बार और होटल से प्रतिमाह 100 करोड़ रुपये वसूली के लिए कहते थे, बीजेपी उद्धव सरकार पर हमलावर हो गयी है. केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि अगर महाराष्ट्र में एक मंत्री का टारगेट 100 करोड़ था तो बाकियों का कितना होगा. उद्धव ठाकरे की सरकार के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है कि वे सरकार में एक दिन भी बनी रहे.

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सवाल किया कि सचिन वाजे सालों तक सस्पेंड था. वो सालों के बाद कोरोना काल में नियुक्त किया गया. बीजेपी की तरफ से पहला सवाल ये है कि उनकी नियुक्ति किसके दबाव में की गई. किसका दबाव था, शिवसेना, मुख्यमंत्री या शरद पवार. उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का सवाल ये है कि सदन के अंदर और बाहर सचिन वाजे के रोल को डिफेंड किया गया. जो 2008 से शिवसेना का मेंबर है उसे किसके दबाब में पुलिस फोर्स में शामिल किया गया.

इतना ही नहीं रविशंकर प्रसाद ने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार पर भी सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि शरद पवार का क्या रोल है. वो तो सरकार का हिस्सा नहीं हैं, तो क्यों एक पुलिस कमिश्नर उन्हें ब्रीफ क्यों कर रहा था. 100 करोड़ रुपये की उगाई एक अपराध है. अगर शरद पवार को पुलिस कमिश्नर ब्रीफ कर रहे हैं तो वो क्यों कर रहे हैं, और अगर इस गंभीर आरोप के बारे में ब्रीफ कर रहे हैं तो उन्होंने इसे रोकने के लिए क्या एक्शन लिया. उन्होंने कहा कि शरद पवार की खामोशी बहुत गंभीर सवाल उठाती है. उद्धव ठाकरे की शांति क्या कहती है. सदन के अंदर सचिन वाजे को डिफेंड करना और बड़ा सवाल उठाता है.

केंद्रीय कानून मंत्री ने आगे कहा कि ये जो गृह मंत्री पर जो आरोप लगा है, वो वसूली अपने लिए कर रहे थे या अपनी पार्टी एनसीपी के लिए कर रहे थे या फिर पूरी सरकार के लिए कर रहे थे. इसपर शरद पवार, उद्धव ठाकरे को भी जवाब देना होगा. अगर मुंबई से 100 करोड़ का टारगेट था तो पूरे महाराष्ट्र का टारगेट क्या था, ये भी देश को  बताना जरूरी है और अगर एक मंत्री का ये टारगेट था तो औऱ मंत्रियों का क्या टारगेट था. उन्होंने कहा कि ये करप्शन नहीं है, इसे कहते हैं ऑपरेशन लूट. सरकारी तंत्र का गलत उपयोग करो और जनता के  पैसे लूटो.

 



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