इस सीजन में अटैकिंग हो जाते हैं नक्सली, देते हैं बड़ी घटनाओं को अंजाम, जानिए वजह

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नई दिल्ली: प्रदेश के बस्तर संभाग यानी दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर जिलों में नक्सली वारदातें आए दिन होती रही हैं. छिटपुट वारदातों के बीच अक्सर समर सीजन यानी गर्मी के समय में बड़े मामले देखे जाते हैं. पिछले 10 सालों की बात करें तो नक्सलियों के अधिकांश बड़े हमले गर्मी के दिनों में और खासकर मार्च-अप्रैल के महीने में हुआ है. 

इसका सबसे बड़ा कारण है विजिबिलिटी का बढ़ जाना. विजिबिलिटी बढ़ते ही नक्सली वारदात को अंजाम देकर भागने में कामयाब हो जाते हैं. चूंकि जंगल के भीतर रास्तों का आइडिया नक्सलियों को बखूबी होता है. बस जंगल-झाड़ बढ़ने से उन्हें भी भागने में असुविधा होती है. इधर विजिबिलिटी बढ़ने से जवान भी सर्चिंग पर आराम से निकल पड़ते हैं. जवानों को भी सर्चिंग करने में सुविधा होती है. 

अब तक के बड़े हमले:

– 13 मार्च 2018: नक्सलियों ने IED विस्फोट कर एंटी लैंड माइन व्हीकल को उड़ा दिया था. इस हमले में 9 जवान शहीद हो गए और 3 गंभीर रूप से घायल हो गए थे. 

– 24 अप्रैल 2017: सुकमा के दोरनापाल में सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन रोड ओपनिंग पार्टी के तौर पर निकली थी. नक्सलियों ने एंबुश में फंसा हमला कर दिया. जवान चारो ओर से घिर गए. जिस अटैक में 25 जवान शहीद हो गए और 7 घायल हो गए. 

– 11 मार्च 2017:  नक्सलियों ने सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को निशाना बनाया था इस हमले में 11 जवान शहीद हो गए थे.

अप्रैल 2015: दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में नक्सलियों के बिछाए बारूदी सुरंग के फटने से सुरक्षा बल के 4 जवान शहीद हो गए. वहीं 8 जवान घायल हो गए थे.

– 12 अप्रैल 2014: बस्तर में नक्सली हमला हुआ था जिसमें 5 जवान शहीद हो गए थे और 14 लोगों की मौत हो गई थी.

– 11 मार्च 2014: झीरम घाटी में नक्सलियों के बड़े अटैक में 14 जवान शहीद हो गए थे.

– 25 मई 2013: इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया. झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया. जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित 30 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

– 6 अप्रैल 2010:  दंतेवाड़ा में सबसे बड़ा नक्सली हमला हुआ था जिसमें 76 जवान शहीद हो गए थे. ये अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जाता है. 



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