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Makar Sankranti 2021 : मकर संक्रांति पर इसबार बन रहा है महासंयोग, जानें- पूजा का शुभ मुहूर्त

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मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य : आज 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति है. इस बार महोदरी नामक मकर संक्रांति के अवसर पर 5 ग्रहों का बहुत शुभदायी संयोग बन रहा है. सूर्य, चंद्रमा, शनि, बुध और गुरु  अर्थात 5 ग्रह ,मकर राशि में होंगे. पौष शुक्ल प्रतिपदा, श्रवण नक्षत्र कालीन, सुबह 8 बजकर 14 मिनट पर मकर लग्न में प्रवेश करेगी. यों तो संक्राति पूरा दिन रहेगी परंतु पुण्य काल दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक ही रहेगा. 

नवग्रहों में सूर्य ही एकमात्र ग्रह है जिसके आस पास सभी ग्रह घूमते हैं. यही प्रकाश देने वाला पुंज है जो धरती के अलावा अन्य ग्रहों पर भी जीवन प्रदान करता है. प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जिसे सामान्य भाषा में मकर संक्रान्ति कहते हैं. यह पर्व दक्षिणायन के समाप्त होने और उत्तरायण प्रारंभ होने  पर मनाया जाता है. वर्ष में 12 संक्रांतियां आती है. परंतु विशिष्ट कारणों से इसे ही  सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है.

यह एक खगोलीय घटना है जब सूर्य हर वर्ष धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है और हर बार यह समय लगभग 20 मिनट बढ़ जाता है. अतः 72 साल बाद एक दिन का अंतर पड़ जाता है. पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास यह संक्राति 10 जनवरी के आसपास पड़ती थी और अब यह 14 व 15 जनवरी को होने लगा है. लगभग 150 साल के बाद 14 जनवरी की डेट  आगे पीछे हो जाती है. सन् 1863 में मकर संक्राति 12 जनवरी को पड़ी थी. 2012 में सूर्य मकर राशि में 15 जनवरी को आया था. 2018 में 14 जनवरी और 2019 तथा 2020 में यह 15 जनवरी को पड़ी थी. गणना यह है कि 5000 साल बाद मकर संक्राति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनानी पड़ेगी.

जितने समय में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाती है, उस अवधि को सौर वर्ष कहते हैं. धरती का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना ‘क्रान्ति चक्र’ कहलाता है. इस परिधि को 12 भागों में बांटकर 12 राशियां बनी हैं. पृथ्वी का एक राशि से दूसरी में जाना ‘संक्रान्ति ’ कहलाता है. यह एक खगोलीय घटना है जो साल में 12 बार होती है. सूर्य एक स्थान पर ही खड़ा है, धरती चक्कर लगाती है. अतः जब पृथ्वी मकर राशि में प्रवेश करती है. इसलिए इसे मकर संक्रांति कहते हैं.

इसी प्रकार सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाना उत्तरायण कहलाता है. उत्तरायण आरंभ होते ही दिन बड़े होने लगते हैं. रातें अपेक्षाकृत  छोटी होने लगती हैं. इस दिन पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान, दान,देव कार्य एवं मंगलकार्य करने से विशेष लाभ होता है.

ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य, कर्क व मकर राशियों को विशेष रुप से प्रभावित करते हैं. भारत उत्तरी गोलार्द्ध में है. सूर्य मकर संक्रांति से पूर्व, दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है अतः सर्दी के मौसम में दिन छोटे रहते हैं. इस दिन सूर्य के उत्तरायण में आने से दिन बड़े होने शुरु होते हैं और शरद ऋतु का समापन आरंभ हो जाता है. प्राण शक्ति बढ़ने से कार्य क्षमता बढ़ती है. अतः  भारतीय सूर्य की उपासना करते हैं. यह संयोग प्रायः 14 जनवरी को ही आता है. संक्रमण की गति 6 अप्रैल के बाद कम होनी आरंभ हो जाएगी. मकर राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का भी प्रभाव रहेगा. विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक सफल रहेंगे. संक्रमण नहीं होगा उल्टे लंबे चल रहे रोग का निवारण होगा.



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