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Makar Sankranti 2021 : मकर संक्रांति पर जरूर करें ये काम, धन की कभी नहीं होगी कमी

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मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य : देशभर में आज मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. सुबह से ही देशभर के तमाम पवित्र सरोवरों और घाटों पर लोगों की भीड़ उमर रही है. लोग पवित्र सरोवरों में स्नान कर अपने-अपने तरीके से सूर्य देव की आराधना कर रहे हैं. मान्यता के मुताबिक इस दिन पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान, दान,देव कार्य एवं मंगलकार्य करने से विशेष लाभ होता है. सूर्योदय के बाद खिचड़ी आदि बनाकर तिल के गुड़वाले लडडू प्रथम सूर्यनारायण को अर्पित करना चाहिए बाद में दानादि करना चाहिए. अपने नहाने के जल में तिल डालने चाहिए.  

इस साल मकर संक्राति पर कई विशेष संयोग बन रहे हैं, जो इस पर्व को और भी शुभ बना रहे हैं. सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करेंगे तब पांच ग्रहों का संयोग बनेगा, जिसमें सूर्य, बुध, गुरु, चंद्रमा और शनि भी शामिल रहेंगे. इस दिन जप, तप, दान और स्नान का विशेष महत्व है. 

शास्त्रों मे दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मक समय तथा उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है. पौराणिक संदर्भ में मान्यता है कि भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उनके गृह आते हैं. मकर राशि के स्वामी चूंकि शनिदेव हैं, इस लिए भी इसे मकर संक्राति कहा जाता है. 

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने देह त्याग का समय यही चुना था. भारत में यशोदा जी ने इसी संक्रान्ति पर श्री कृष्ण को पुत्र रुप में प्राप्त करने का व्रत लिया था. इसके अलावा यही वह ऐतिहासिक एवं  पौराणिक दिवस है जब गंगा नदी, भगीरथ के पीछे पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगासागर तक पहुंची थी. मान्यता है कि मकर संक्रान्ति पर यज्ञ या पूजापाठ मे अर्पित किए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देव व पुण्यात्माएं धरती पर आती हैं.

देव स्तुति , पित्तरों का स्मरण करके  तिल, गुड़, गर्म वस्त्रों कंबल आदि का दान जनसाधारण, अक्षम या जरुरतमंदो या धर्मस्थान पर करें. माघ मास माहात्म्य सुनें या करें . इस दिन को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुणा फल देता है.

‘ओम नमो भगवते सूर्याय नमः’ या ‘ओम सूर्याय नमः’ का मंत्र जाप करें. माघ माहात्म्य का पाठ भी कल्याणकारी है . सूर्य उपासना कल्याण कारी होती है. 

सूर्य ज्योतिष में हडिड्यों के कारक भी हैं अतः जिन्हें जोड़ों के दर्द सताते हैं या बार बार दुर्घनाओं में फ्रैक्चर होते हैं उन्हें इस दिन सूर्य को जल अवश्य अर्पित करना चाहिए. पतंग उड़ाने की प्रथा भी इसी लिए बनाई गई ताकि खेल के बहाने, सूर्य की किरणों को शरीर में अधिक  ग्रहण किया जा सके.

उत्तर भारत में इस त्योहार को माघ मेले के रुप में मनाया जाता है तथा इसे दान पर्व माना जाता है. 14 दिसंबर से 14 जनवरी तक खर मास या मल मास माना जाता है जिसमें विवाह संबंधी मांगलिक कार्य नहीं किये जाते अतः 14 जनवरी से अच्छे दिनों का आरंभ माना जाता है.

मकर संक्राति के स्नान से लेकर शिवरात्रि तक स्नान किया जाता है. इस दिन खिचड़ी सेवन तथा इसके दान का विशेष महत्व है. इस दिन को खिचड़ी भी कहा जाता है. महाराष्ट्र् में इस दिन गुड़ तिल बांटने की प्रथा है. यह बांटने के साथ साथ मीठा बोलने के लिए भी आग्रह किया जाता है. गंगा सागर में भी इस मौके पर मेला लगता है. 

कहावत है- सारे तीरथ बार बार – गंगा सागर एक बार. तमिलनाडु में इसे पोंगल के रुप में चार दिन मनाते हैं और मिट्टी की हांडी में खीर बनाकर सूर्य को अर्पित की जाती है. पुत्री तथा जंवाई का विशेष सत्कार किया जाता है. असम में यही पर्व भोगल बीहू हो जाता है.

यह संक्रान्ति काल मौसम के परिवर्तन और इसके  संक्रमण से भी बचने का हैं. इसी लिए तिल या तिल से बने पदार्थ खाने व बांटने से मानव शरीर में उर्जा का संचार होता है. तिल मिश्रित जल से स्नान,तिल उबटन, तिल भोजन, तिल दान, गुड़ तिल के लडडू मानव षरीर को सर्दी से लड़ने की क्षमता देते हैं.

इस दिन खिचड़ी के दान तथा  भोजन को भी विशेष महत्व दिया गया है. उत्तर प्रदेश के लोग इसे ‘खिचड़ी ’ के रुप में मनाएंगे और महाराष्ट्र्यिन ‘ ताल- गूल’ नामक हलवा बाटेंगे. बंगाल से आए लोग भी तिल दान करेंगे.

 



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