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Chhattisgarh Attack: जवान की रिहाई में स्थानीय पत्रकारों ने निभाई अहम भूमिका, जानिए कैसे शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला

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नई दिल्ली: गुरुवार शाम पूरे देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई जब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवान राकेश्वर सिंह को रिहा कर दिया है. नक्सलियों ने इस जवान को बीते शनिवार को बीजापुर-सुकमा हमले के बाद बंधक बना लिया था. इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीजापुर के दो स्थानीय पत्रकारों के नाम देशभर की सुर्खियों में शुमार हो गए हैं. ये पत्रकार हैं- गणेश मिश्रा और मुकेश चंद्रकार. बता दें कि सबसे पहले नक्सलियों ने बुधवार को गणेश मिश्रा को ही फोन कर जवान को अगवा करने की जानकारी दी थी.

खुद गणेश मिश्रा ने एएनआई से हुई बातचीत में इस बात को स्वीकारा था. उन्होंने बयान जारी कर कहा था कि “मुझे नक्सलियों की तरफ से दो फोन आए, जिसमें उन्होंने कहा कि हमारा एक जवान उनकी हिरासत में है. उन्होंने ये भी कहा कि जवान को गोली लगी थी और उसे चिकित्सा दी गई, और उसे 2 दिनों में रिहा कर दिया जाएगा. साथ ही उन्होंने जवान का एक वीडियो और फोटो जल्द ही जारी करने की भी बात कही.”

बता दें कि जवान की रिहाई के बाद भी गणेश मिश्रा घटनास्थल पर ही मौजूद थे और इन्होंने ही कोबरा जवान राकेश्वर सिंह की रिहाई का वीडियो शूट किया, जिसमें नक्सली जवान की रस्सियों को खोलते नजर आ रहे हैं.

इस पूरे मामले में इन पत्रकारों की भूमिका इससे भी समझी जा सकती है कि जवान राकेश्वर सिंह की रिहाई के बाद उन्हें सौंपने के लिए सुरक्षाबलों या किसी राजनेता को नहीं बुलाया था. बल्कि कोबरा जवान को इन्हीं पत्रकारों को सौंपा गया, जो बाइक से जवान को अपने गंत्वय स्थान तक लेकर पहुंचे.

राकेश्वर सिंह मन्हास की रिहाई के बाद इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाने की वजह गणेश मिश्रा और मुकेश चंद्रकार की हिम्मत की देशभर में सराहना की जा रही है.



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