एलजी को दिल्ली की ‘सरकार’बताने वाले कानून को चुनौती

एलजी को दिल्ली की ‘सरकार’बताने वाले कानून को चुनौती


नयी दिल्ली, 4 मई (एजेंसी)

दिल्ली हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल (एलजी) की शक्तियां बढ़ाने वाले ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार’ (जीएनसीटीडी) संशोधित कानून को रद्द करने के लिए दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को केंद्र से जवाब मांगा. चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने कानून और गृह मंत्रालयों को इस याचिका पर नोटिस जारी किये. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्थायी वकील अजय दिग्पॉल ने मंत्रालयों की ओर से नोटिस स्वीकार किये.

कानून के छात्र श्रीकांत प्रसाद द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि 27 अप्रैल को लागू हुए कानून में ‘दिल्ली सरकार को उपराज्यपाल के तौर पर पुन: परिभाषित किया गया है’ और दिल्ली विधानसभा की सदन चलाने की शक्तियों में कटौती की गयी है. प्रसाद ने दलील दी कि इस कानून के प्रावधान उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोधाभासी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उपराज्यपाल भूमि, पुलिस और जन आदेश के मामलों को छोड़कर अन्य मामलों में मंत्री परिषद की सलाह मानने को बाध्य होंगे. प्रसाद ने अदालत में कहा कि इस कानून से दिल्ली के नागरिकों की परेशानियां बढ़ने जा रही हैं, जो पहले ही महामारी और ऑक्सीजन, आवश्यक दवाओं व बिस्तरों की कमी से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधित कानून के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 239एए और विभिन्न मौलिक अधिकारों के भी विरोधाभासी हैं. अनुच्छेद 239एए में कहा गया है कि उपराज्यपाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख होंगे और जिन मामलों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार है, उन पर वह मंत्री परिषद की सलाह मानेंगे.



दैनिक ट्रिब्यून से फीड