केरल में पिनराई विजयन के नेतृत्व में लेफ्ट की सत्ता में जबरदस्त वापसी, जानें कैसे टूटा चुनाव-दर-चुनाव सत्ता परिवर्तन का 44 साल पुराना रिकॉर्ड

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नई दिल्ली:  केरल विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं. इन चुनावों में लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ (LDF) ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. दक्षिणी राज्य केरल में 140 विधानसभा सीटों में से बहुमत के लिए 71 सीटें चाहिए. इनमें से (LDF) ने 91 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया है.

बीजेपी जीरो पर आउट

वहीं प्रमुख प्रतिद्वंदी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन यूडीएफ (UDF) महज 40 सीटों पर सिमट गया. जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) का केरल में खाता तक नहीं खुल पाया और अन्य नौ सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के सुरेंद्रन तक अपनी दोनों सीटों में से किसी एक पर भी जीत की पताका नहीं फहरा पाए.  

वापसी की राह बेहतर आपदा प्रबंधन से खुली

यदि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बात करें तो उन्होंने धर्मदाम सीट से 50,123 वोटों के साथ बड़ी जीत हासिल की है. जानकारों के मुताबिक बीते पांच साल में राज्य में आई दो बड़ी बाढ़ और दो वर्षों से कोरोना महामारी से निपटने के लिए पिनराई विजयन सरकार ने जो बेहतरीन प्रबंधन किए, उनका चुनाव में उन्हें बड़ा फायदा मिला.

केरल में लेफ्ट की ये बढ़त इसलिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि यहां बीते 44 वर्षों से चुनाव-दर-चुनाव सत्ता परिवर्तन का चलन रहा है. लेकिन इस बार सरकार में पांच वर्ष रहने के बाद भी लेफ्ट एक बार फिर स्पष्ट रूप से सत्ता की सीढ़ियां चढ़ता नजर आ रहा है.

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इन चुनावों में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका केरल का ही माना जाएगा. हालांकि तमिलनाडु को छोड़कर अन्य तीन राज्यों में भी कांग्रेस कुछ भी खास कर पाने में नाकाम रही है. लेकिन उसे केरल से बड़ी उम्मीदें थीं.

ऐसा इसलिए क्योंकि केरल में चुनाव-दर-चुनाव सत्ता परिवर्तन का चलन रहा है. ऐसे में संभावना जताई जा रही थी कि केरल देशभर में कांग्रेस के डूबते जहाज को बड़ा सहारा दे सकता है. फिर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी केरल के वायनाड से ही सांसद हैं. इस नाते उन्होंने अपना सर्वाधिक समय पांचों राज्यों में से केरल को ही दिया था. लेकिन उनके प्रयास पार्टी के किसी काम नहीं आए.

आइए एक नजर डालते हैं, केरल के विधानसभा चुनाव नतीजों पर. 

बता दें कि केरल में पिनारई विजयन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की सरकार है. 2016 के विधानसभा चुनाव में एलडीएफ- 91 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 47 सीटें मिली थीं. 

केरल में भी एक ही चरण में 6 अप्रैल को चुनाव करवाया गया. केरल में 73.58 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. राज्य के सभी 140 विधानसभा सीटों पर 2.74 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.  केरल की सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी की ओर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जमकर रैली की. वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी जमकर मेहनत की. 



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