कुलदीप बिश्नोई को मिली ‘बिश्नोई रत्न’ की उपाधि, इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल को मिला था यह खिताब

अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के संरक्षक कुलदीप बिश्नोई को बिश्नोई समाज के उत्थान के लिए उनके द्वारा किए गए विलक्षण कार्यों के लिए ‘बिश्नोई रत्न’ की उपाधि दी गई है. यह उपाधि उनकी संस्था ने ही दी है.

मुकाम में बैठक को संबोधित करते हुए हीराराम भंवाल ने कहा कि यह पूरे देश के बिश्नोई समाज के लिए गौरव का क्षण है कि स्व. चौ. भजनलाल के बाद कुलदीप बिश्नोई को उनके कार्यों के लिए महासभा उन्हें ‘बिश्नोई रत्न’ का सम्मान देने जा रही है.

उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से कुलदीप बिश्नोई राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ही सुझबुझ से बिश्नोई समाज को एकता के सूत्र में पिरोकर बिश्नोई समाज को नई पहचान दे रहे हैं. जिस प्रकार से चौ. भजनलाल ने अपने कार्यों से बिश्नोई समाज को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई थी, उन्हीं के पद्चिन्हों पर चलते हुए कुलदीप बिश्नोई ने राजनीति से ऊपर उठकर हमेशा समाज को ऊंचा स्थान दिया और जब-जब समाज की प्रतिष्ठा पर बात आई तो उन्होंने हमेशा अपने विलक्षण प्रयासों से एक ढाल बनकर बिश्नोई समाज के गौरव पर कभी आंच नहीं आने दी.

हीराराम भंवाल ने कहा कि कुलदीप बिश्नोई ने समाज को एकता के सूत्र में बांधा है. उनके प्रयासों से ही आज बिश्नोई समाज राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर पूरे देश में अपनी एक विशेष पहचान रखता है. समाज से जुड़े हर संवेदनशील मुद्दे को कुलदीप बिश्नोई ने हमेशा गंभीरता दिखाते हुए बड़ी ही सुझबुझ से उसको सुलझाया. चाहे बात भंवरी देवी कांड की हो तो उन्होंने राजनीति की परवाह किए बगैर राष्ट्रपति से मुलाकात करके समाज की ओर से पक्ष रखा, सलमान खान प्रकरण, गुडग़ांव में धर्मशाला के लिए जमीन आंवटित करवाना हो, हरिद्वार में धर्मशाला की जमीन का मामला हो, समाज से जुड़े नेताओं को टिकट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस या भाजपा के बड़े नेताओं के समक्ष पैरवी करना हो, बिश्नोई समाज के सभी मुख्य सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेना हो या फिर हाल ही में घटित हुआ विष्णुदत बिश्नोई प्रकरण है, जिसमें उन्होंने सीबीआई जांच की मांग को लेकर अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के खिलाफ आंदोलन तक की चेतावनी दे दी थी.

हीराराम भंवाल ने कहा कि पिछले काफी समय देश के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले बिश्नोई समाज के गणमान्य व्यक्तिओं द्वारा यह मांग उठाई जा रही थी कि कुलदीप बिश्नोई को उनके कार्यों के लिए ‘बिश्नोई रत्नÓ की उपाधि से नवाजा जाए. सैंकड़ों पत्रों, सोशल मीडिया के माध्यम से महासभा के पास लोगों की जोर-शोर से यह मांग आ रही थी. बिश्नोई समाज की भावनाओं को देखते हुए अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने बैठक बुलाने का निर्णय किया और सभी लोगों की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि ‘बिश्नोई रत्न’ स्व. चौ. भजनलाल की तरह ही कुलदीप बिश्नोई को भी ‘बिश्नोई रत्न’ की उपाधि से महासभा उनका सम्मान करेगी.

संरक्षक कुलदीप बिश्नोई ने यह सम्मान ग्रहण से मना कर दिया है, जो उनकी त्याग की भावना को दर्शाता है, परंतु महासभा ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि उनके मना करने के बावजूद महासभा उन्हें यह सम्मान से नवाजेगी, ताकि उनका मनोबल बढ़ सके और समाज के युवाओं के सामने एक आदर्श उदाहरण पेश किया जा सके.

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