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स्कूलों में क्या है कोरोना से लड़ने की तैयारियां, जानिए

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ठाकुर भूपेन्द्र सिंह, अहमदाबाद: नए साल 2021 में अब लगभग पूरे देश में स्‍कूल खुलने जा रहे हैं. कोरोना वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी के बाद संक्रमण के डर से बंद पड़े स्कूलों के खुलने की शुरुआत हो गई है गुजरात में 11 तारीख से आंशिक रूप से स्कूल्स कॉलेज खुलने जा रहे हैं और उसके पहले सभी स्कूल्स सरकारी मापदंडो पर खरा उतरने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.

अभिभावकों और शिक्षकों के साथ चर्चा के बाद गुजरात में 11 से आंशिक रूप से स्कुल कॉलेज खुल रहे हैं, पिछले नौ महीनों से बंद स्कूलों में जल्द ही फिर चहल-पहल देखने को मिलेगी और ये चहल पहल सुरक्षित हो, बच्चों के स्वास्थ के साथ किसी तरह का समझौता न हो, इसके लिए स्कूल प्रबंधन हर वो इंतजाम कर रहा है, जिससे कोरोना को स्कूल आने वाले बच्चों से दूर रखा जा सके. 

 तैयारियों की बात करें तो स्कूल के प्रवेश द्वार पर ही सेनेटाइज़ टेम्पेरेचर चेकिंग और ऑक्सीजन लेवल चेक करके ही स्कूल परिसर में प्रवेश दिया जाएगा. प्रवेश के समय सोशल डिस्टन्सिंग मेन्टेन हो इसके लिए दो गज की दूरी चिन्हित की गई है, क्लास रूम में बैठने की व्यस्था भी इस प्रकार से की गई है कि दो छात्रों के बिच सोशल डिस्टन्सिंग बनी रहे. 

एक बेंच छोड़कर छात्रों को बिठाया जाएगा और उनके आने से पहले सभी क्लास रूम को सेनेटाइज़ किया जा रहा है. 12वीं कक्षा के प्रैक्टिकल रूम भी इस तरह से तैयार किए गए हैं कि छात्र एक दूसरे के संपर्क से दूर रहें. स्कूल के रेलिंग्स पिल्लर्स दरवाजे यहां तक कि वाशरूम भी प्रॉपर किये जा रहे हैं और उसमे भी छात्रों की भीड़ न हो इसका ध्यान रखा जाएगा. 

स्कूल भले ही शुरू हो रहे हैं लेकिन कक्षा 10 व 12वीं के छात्र-छात्राएं अपने माता-पिता से मंजूरी लेकर ही स्‍कूल आ सकेंगे. हलाकि सभी छात्र स्कूल आएंगे इसको लेकर स्कुल प्रबंधन संशय में है मगर उनका मानना है की 11वीं को छात्रों के आने की शुरुआत होगी लेकिन उनकी संख्या में धीरे धीरे इज़ाफ़ा होगा जैसे जैसे छात्र बढ़ेंगे, स्कूल नहीं आने वाले छात्रों का भी विश्वास मजबूत होगा. 

ऐसे में स्कूल शुरू होने के बाद भी क्लास के सभी छात्र कुछ महीने बाद से ही स्कुल में हाजिरी देंगे जिसे लेकर अभिभावक भी इस समय असमंजस में है की वो अपने बच्चों को स्कूल भेजे या न भेजे. 

खास बात ये भी है कि स्कूल में एक मेडिकल रूम भी बनाया गया है और इस मेडिकल रूम को छोटा मोटा अस्पताल का रूप दिया गया है जहा डॉ मौजूद रहेंगे और किसी भी छात्र को अगर इमीडियेट मेडिकल ट्रीटमेंट की जरुरत पड़ी तो उसे तुरंत वो सेवा दी जा सके. 

बहरहाल ये तमाम तैयारियां बड़ी स्कूलों की है लेकिन शहर में कई ऐसी स्कूल्स हैं, जहां इस तरह बड़े परिसर नहीं है और हो सकता है इतनी ज्यादा सावधानी भी न बरती जाए ऐसे में अगर किसी छात्र को कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन को उठानी होगी यहां बता दें कि शिक्षामंत्री ने पहले ही साफ कर दिया है कि जितना पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, उतने की ही परीक्षा होगी. 

सरकार ने इन छात्रों को मास प्रमोशन नहीं देने का भी निर्णय किया है. बिहार और ओडिशा में स्‍कूल खुलने के बाद अब गुजरात में भी इसकी शुरुआत हो रही है.  कोरोना संकट में करीब 10 माह से बंद रहे स्‍कूल अब नए साल में खुल रहे हैं. सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं की तारीखें भी घोषित हो चुकी हैं, ऐसे में अब स्कूल संचालक भी क्लास में स्कूल छात्रों की हाजिरी चाहते हैं.  

हालांकि देश में कोरोना का संकट अभी कायम है. नए स्‍ट्रेन के बाद सरकारें भी सतर्क हैं, इसलिए गाइडलाइन एवं सुरक्षा के मानकों का पालन करते हुए स्‍कूल खोले जाएंगे. स्कूल खोलने की जो योजना बनाई गई है, उसके अनुसार 15 जनवरी के बाद नौवीं से 12वीं तक के छात्रों को अलग-अलग दिनों पर बुलाया जा सकता है. चार मई से जिनकी बोर्ड की परीक्षाएं और उससे पहले एक मार्च से प्रैक्टिकल परीक्षाएं भी होनी हैं.



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