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इस राज्य में ई-व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार की बड़ी घोषणा, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सिनेमा हॉल में रखनी होगी ये जगह खाली

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नई दिल्ली: दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने राजधानी में ई-व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए एक अहम फैसला लिया है. शुक्रवार को जारी किए गए एक आदेश में दिल्ली सरकार ने कहा है कि शहर की सभी व्यवसायिक इमारतों, जैसे मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सिनेमा हॉल, ऑफिस स्पेस, होटल और रेस्तरां में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए रिर्जव स्पेस रखने के निर्देश जारी किए हैं. दिल्ली सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन धारकों को गाड़ियों की चार्जिंग में होने वाली असुविधा से बचाने के लिए ये कदम उठाया गया है.

बता दें कि ई-चार्जिंग स्पेस को बढ़ावा देना दिल्ली सरकार के ‘स्विच दिल्ली’ अभियान का हिस्सा है, जिसे पिछले महीने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुरू किया था. 

इस संदर्भ में दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि, जिन इमारतों में 100 से अधिक गाड़ियां पार्क करने की जगह मौजूद है, वहां 5 प्रतिशत जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए रिजर्व रखना होगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इसे लेकर जिन मॉल, होटल, अस्पताल और कार्यालय से संपर्क किया है, उन्हें नए आदेशों को अमल में लाने के लिए साल के अंत तक का समय दिया जाएगा.

जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ई-चार्जिंग स्पेस को बढ़ावा देने से इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा. 

खबरों की मानें तो दिल्ली सरकार इस साल दिसंबर तक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 10,000 चार्जिंग पाइंटस का सेटअप करवा रही है. साथ ही दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी भी दी जा रही है.  दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाला पहला राज्य है. दिल्ली में इस समय 72 ई-चार्जिंग स्टेशन है, जो कि बाकी राज्यों की तुलना में सर्वाधिक हैं.

साथ ही ये भी माना जा रहा है कि दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल एक बड़ा कदम साबित होगा. इसके पहले दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए ऑड-ईवन स्कीम को भी लागू किया गया था. हर साल सड़को पर वाहनों की संख्या दुगुनी होती जा रही है, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है. दिल्ली में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, जिसे इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से कम किया जा सकता है.

 

आप को बता दें कि केंद्र सरकार भी 2030 तक पूरी तरह ई-व्हीकल्स पर निर्भर होने की दिशा में तेजी से काम कर रही है.



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