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2019 में हरियाणा में 4191 लोगों ने आत्महत्या की जिनमें 219 किसान शामिल

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सांकेतिक तस्वीर

2019 में हरियाणा में 4191 आत्महत्याएं हुईं. 2018 से 18.2 प्रतिशत ज्यादा है. 2018 में 3,547 लोगों ने अपनी जान ली थी.

एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स ऑन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार ड्रग्स या शराब की लत के कारण 87 लोगों ने आत्महत्या की, जबकि ड्रग ओवरडोज के कारण 13 लोगों की मौत हो गई.

2018 में, ड्रग्स या अल्कोहल की लत के कारण 137 लोगों ने आत्महत्या की थी जबकि ड्रग ओवरडोज के कारण 86 लोगों की मौत हो गई थी.

पड़ोसी राज्य पंजाब में ड्रग ओवरडोज के कारण 45 लोगों की मौत हो गई और 102 ने 2019 में ड्रग्स या शराब की लत के कारण आत्महत्या कर ली. जबकि पिछले साल ड्रग ओवरडोज के कारण 78 की मौत हो गई, वहीं 55 ने नशे की वजह से आत्महत्या की थी.

हरियाणा और पंजाब

2019 में हरियाणा में 4,191 आत्महत्याएं हुईं. 2018 से 18.2 प्रतिशत ज्यादा. 2018 में 3,547 लोगों ने अपनी जान ली थी. 

पंजाब में आत्महत्याओं में 37.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, क्योंकि 2018 में 1,714 की तुलना में 2019 में 2,357 ने आत्महत्या की थी.

हरियाणा में 2019 में सबसे ज्यादा आत्महत्याएँ बीमारी (753) के कारण हुईं, इसके बाद पारिवारिक समस्याएँ (649), विवाह-सम्बन्धी समस्याएँ (317), पेशेवर या करियर की समस्याएँ (63) और 587 मामलों में कारण नहीं मालूम हैं.

विवाह से संबंधित मुद्दों के बीच, 60 ने अपनी शादी के “गैर-निपटान” के कारण आत्महत्या कर ली थी. इसमें 43 पुरुष और 17 महिलाएं शामिल थीं.

इसके अलावा, 20 आत्महत्याएँ अतिरिक्त-वैवाहिक मामलों के कारण थीं जिनमें 15 पुरुष और पाँच महिलाएँ शामिल थीं.

हरियाणा में 302 आत्महत्याओं के पीछे मानसिक बीमारी कारण थी जिसमें 242 पुरुष और 60 महिलाएं शामिल थीं जबकि 422 मामले लंबी बीमारी के थे.

प्रेम संबंधों में मुद्दों के कारण 17 ने आत्महत्या की, जिसमें 10 पुरुष और सात महिलाएं शामिल थीं.

आत्महत्या के पेशे-वार के वितरण में, हरियाणा में 402 गृहिणियों ने आत्महत्या की थी. इसमें राज्य की कुल महिलाओं में आत्महत्या का 45 प्रतिशत शामिल था.

जबकि 179 मामले छात्रों में से थे जिनमें 123 पुरुष और 56 महिलाएं शामिल थीं. इसके अलावा, बेरोजगारों की 503 आत्महत्याओं में 2019 में 464 पुरुष और 39 महिलाएं शामिल हैं.

किसानों की आत्महत्या

रिपोर्ट के अनुसार 2019 में 219 खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या कर ली थी. यह संख्या आत्महत्याओं में लगभग दोगुनी हो गई क्योंकि 2018 में 104 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे.

पंजाब में किसानों की आत्महत्या में वृद्धि देखी गई. 2019 में, 239 किसानों ने आत्महत्या की थी. जिसमें 203 किसान अपनी जमीन पर खेती करते थे जबकि 36 लोग ऐसे थे जिन्होंने पट्टे की जमीन पर खेती की थी. 

इसके अलावा, कृषि श्रमिकों द्वारा 63 आत्महत्याएं की गईं. 2018 में, किसानों द्वारा 229 आत्महत्याएं की गईं, जिनमें 202 लोग जो अपनी जमीन पर खेती करते हैं और 27 लोग जो पट्टे पर जमीन पर काम करते थे. 2018 में खेतिहर मजदूरों द्वारा 94 आत्महत्याएं की गईं.

आत्महत्या करने का तरीका

हरियाणा में जीवन समाप्त करने का सबसे आम तरीका फांसी है, क्योंकि 1,177 (28.1 प्रतिशत) ने अपने जीवन को समाप्त करने के लिए इसका इस्तेमाल किया. जबकि 686 लोगों ने जहर (16.4 प्रतिशत) लिया, जिसमें 336 कीटनाशक का सेवन शामिल था. बिजली के तार को छूकर 172 आत्महत्याएं हुईं और 16 लोगों ने खुद को जख्मी करके आत्महत्या की.

अधिकांश आत्महत्याएं हरियाणा में कम आय वाले समूहों में हुईं. ऐसे लोगों में 2,336 आत्महत्याएं (55.7 प्रतिशत) थीं, जिनकी कमाई 1 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम थी. 1,391 आत्महत्याओं (33.2 प्रतिशत), जिनकी आय 1 लाख रुपये से 5 लाख रुपये प्रति वर्ष के बीच थी.

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