News
भारत

दिल्ली में ऑक्सीजन किल्लत पर आज हाईकोर्ट सुनवाई, केंद्र सरकार आज देगी नोटिस का जवाब

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: दिल्ली में आज एकबार फिर ऑक्सीजन की किल्लत पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब देगी. इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा था कि इस मामले में उसस पर अवमानना का मामला क्यों न चले.

आपको बता दें कि राजधानी में कोरोना के बढ़ते मामलों, अस्पताल में बेड की कमी, ऑक्सीजन की किल्लत और दवाइयों की कमी जैसे अलग-अलग मुद्दों पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है. इस मसले पर दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई का आज लगातार 15वां दिन है. आज होने वाली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार हाईकोर्ट की ओर से मंगलवार को जारी किए गए शो कॉज नोटिस पर अपना जवाब देगी. 

ऑक्सीजन की कमी को लेकर मंगलवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि ‘देश में जो स्थिति है, उसे देखकर आप अंधे हो सकते हैं. हम नहीं. हम लोगों को मरता हुआ नहीं देख सकते.’ दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- ‘केंद्र ने तो आंखों पर पट्टी बांध ली है, हम ऐसा नहीं कर सकते.’ हाईकोर्ट में अमिकस क्यूरी ने जानकारी दी है कि दिल्ली में कई लोग ऑक्सीजन की कमी की वजह से मर रहे हैं. हाईकोर्ट में एमेकस क्यूरी ने सुझाव दिया है कि कुछ जगह पर ऑक्सीजन को स्टोर किया जा सकता है, जिससे कमी का संकट कम हो.

जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने दिल्ली में कोरोना महामारी से पीड़ित मरीजों के इलाज़ के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन न दिए जाने पर हैरानी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार से पूछा था कि ‘क्या आप हकीकत से दूर किसी और ही दुनिया में रहते हैं?’ साथ ही कोर्ट ने कहा कि ‘आप भले ही किसी शुतुरमुर्ग की तरह रेत में अपना मुंह छिपा लें, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे.’

 

हालांकि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट की इस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया कि दिल्ली के मौजूदा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए उसे 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन हासिल करने का अधिकार नहीं है. अदालत ने केंद्र की इस दलील पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ‘हम हर दिन इस निराशाजनक स्थिति को देख रहे हैं, जहां मरीजों को ऑक्सीजन या अस्पताल में ICU बेड नहीं मिल पा रहे हैं. अस्पतालों को ऑक्सीजन की कमी के कारण बेड की संख्या घटानी पड़ रही है.’

 



न्यूज़24 हिन्दी

You might also like