Haryana : हरियाणा में बेरोजगारों की बदलेगी किस्मत, मधुमक्खी पालन से ऐसे करें बंपर कमाई

Published On: December 29, 2025
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The fortunes of unemployed people in Haryana will change.

Haryana : हरियाणा के नूंह में बेरोजगार युवाओं और किसानों के लिए एक अच्छी खबर आई है। जिनके पास अपनी जमीन नहीं है, मधुमक्खी पालन उनके लिए आय का बेहतरीन जरिया बन सकता है। जिला बागवानी विभाग की मधुमक्खी पालन योजना के तहत न सिर्फ प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि भारी अनुदान, बैंक लोन में सहायता और शहद की सरकारी खरीद की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

जानें कितने खोले प्रशिक्षण केंद्र

जिला बागवानी अधिकारी डॉ. अब्दुल रजाक ने कहा कि प्रदेश भर में मधुमक्खी पालन के लिए 13 प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं, जिनमें केवीके मंडकोला, केवीके भूपानी सहित अन्य संस्थान शामिल हैं. पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले युवाओं के लिए रहने, खाने और आने-जाने की पूरी व्यवस्था फ्री की गई है. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं को बैंक लोन दिलाने में भी विभाग सहयोग करता है. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद एक लाभार्थी को 50 लकड़ी के बॉक्स उपलब्ध कराए जाते हैं, जिन पर करीब 85 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है.

किसान को केवल 21,600 रुपए का अंशदान करना होता है. फैमिली आईडी, आधार कार्ड और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र के साथ रामनगर पहुंचते ही किसानों को मधुमक्खी के डिब्बे मिल जाते हैं. एक डिब्बे में 8 से 10 फ्रेम होते हैं और इस पर भी लगभग 85,000 रुपए की सहायता बागवानी विभाग द्वारा दी जाती है.

50 किलो तैयार होता शहद

डॉ. रजाक के अनुसार, एक साल में एक डिब्बे से औसतन 50 किलो शहद तैयार हो जाता है. अगर 50 डिब्बों का आकलन किया जाए तो सालाना करीब 2,500 किलो शहद का उत्पादन संभव है. वर्तमान में जिले के पांच किसानों के पास लगभग 800 मधुमक्खी बॉक्स हैं, जिनसे हर साल करीब 26,000 किलो शहद तैयार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने भावांतर भरपाई योजना में भी मधुमक्खी पालन को शामिल किया है.

शहद निकालने की मशीन, डिब्बे, टोपी और अन्य उपकरणों की खरीद के लिए भी बागवानी विभाग सहायता करता है. अगर शहद की गुणवत्ता अच्छी होती है तो बाजार में 110 रुपए प्रति किलो से ज्यादा भाव मिल सकता है. अगर बाजार में खरीदार न मिले तो शहद को ड्रम या बाल्टी में पैक कर रामनगर ले जाने पर 110 रुपए प्रति किलो की दर से सरकारी भुगतान किया जाता है.

Sahab Ram

साहब राम "द न्यूज़ रिपेयर" के एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। साहब का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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