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Haryana: हरियाणा में इन कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, हाईकोर्ट ने सुनाया ये बड़ा फैसला

On: September 12, 2025 7:04 AM
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Haryana News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा राज्य के बिजली निगमों में वर्षों से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन कर्मचारियों को छह हफ्तों के भीतर नियमित किया जाए, अन्यथा उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि यह कर्मचारी 1995 से अस्थायी और तदर्थ आधार पर कार्यरत हैं और इतने वर्षों में उन्हें न्याय के लिए 9 बार अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है, जो कि उनके शोषण और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर छह सप्ताह के भीतर सरकार कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती है, तो याचिकाकर्ताओं को उनके सहकर्मी वीर बहादुर की तरह सभी लाभों, वरिष्ठता और बकाया वेतन सहित स्वतः नियमित माना जाएगा।

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हाईकोर्ट ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें पदों की अनुपलब्धता और शैक्षिक योग्यता की कमी को आधार बनाकर नियमितीकरण से इनकार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी लगातार सेवाएं दे रहे हैं, तो राज्य सरकार एक संवैधानिक नियोक्ता होने के नाते उन्हें स्थायी नियुक्ति देने से इनकार नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य अपनी नीतियां सिर्फ अदालतों के आदेशों से बचने के लिए नहीं बना सकता।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे 1995 से कार्यरत हैं और वर्ष 2005 में अदालत के आदेश के बावजूद उनका नियमितीकरण नहीं किया गया। मई 2025 में फिर से यह कहकर उनका दावा खारिज कर दिया गया कि पद उपलब्ध नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासनिक कारणों को आधार बनाकर नियमितीकरण से इनकार करना गैरकानूनी है।

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जस्टिस बराड़ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे कर्मचारियों से बराबर काम लेकर उन्हें वर्षों तक अस्थायी बनाए रखना असंवैधानिक, गैर-मानवीय और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है। राज्य कोई प्राइवेट संस्थान नहीं बल्कि एक संवैधानिक संस्था है, और वह बजट संतुलन के नाम पर कर्मचारियों की स्थायीत्व की कीमत पर समझौता नहीं कर सकता।

अंत में कोर्ट ने सरकार की आदतन लापरवाही और देरी पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठता है। न्यायाधीश ने सभी राज्य संस्थाओं को जिम्मेदार बनाने के लिए सात ठोस निर्देश भी जारी किए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही और संवैधानिक उल्लंघन से बचा जा सके।

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Sahab Ram

साहब राम "द न्यूज़ रिपेयर" के एक समर्पित और खोजी पत्रकार हैं, जो जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार, जनहित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की झलक मिलती है। साहब का उद्देश्य है—सच्ची खबरों के ज़रिए समाज में बदलाव लाना और उन आवाज़ों को मंच देना जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। पत्रकारिता में उनकी पैनी नजर और निष्पक्ष दृष्टिकोण "द न्यूज़ रिपेयर" को विश्वसनीयता की नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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