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हरियाणा सरकार का धान की खेती पर यू-टर्न, क्या दुष्यंत चौटाला ने मनोहर लाल खट्टर को मजबूर किया?

आदेश में यह भी कहा गया था कि जो भी किसान 50 एचपी इलेक्ट्रिक मोटर के साथ अपने ट्यूबेल का संचालन कर रहे हैं, उन्हें धान उगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. लेकिन अब नए निर्दशों में कहा गया है कि यह सिर्फ एक सलाह थी. 

हरियाणा सरकार ने गुरुवार को धान की खेती पर प्रतिबंध को लेकर अपना रुख नरम किया और नए दिशानिर्देश जारी किया है. 

9 मई के पिछले आदेश में ‘मेरी पानी, मेरी विरासत’ योजना के कार्यान्वयन के लिए, सरकार ने कहा था कि किसानों को अपने खेतों में कम से कम 50 प्रतिशत खेती वाले धान के क्षेत्र में धान के विकल्प वाली फसलें उगानी होंगी जहां पानी का स्तर 40 मीटर से ज्यादा हो. (8 ब्लॉक- रतिया, सिवान, गुहला, पिपली, शाहबाद, बाबैन, इस्माइलाबाद और सिरसा)

आदेश में यह भी कहा गया था कि जो भी किसान 50 एचपी इलेक्ट्रिक मोटर के साथ अपने ट्यूबेल का संचालन कर रहे हैं, उन्हें धान उगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. लेकिन अब नए निर्दशों में कहा गया है कि यह सिर्फ एक सलाह थी. 

पिछले सीजन में आठ ब्लॉकों में धान का रकबा 1,79,951 हेक्टेयर था.

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इससे पहले, यह उल्लेख किया गया था कि जो किसान आठ पहचाने गए ब्लॉकों में अपने धान के 50 प्रतिशत से कम क्षेत्र में विकल्प के तौर पर अन्य फसल की खेती करेंगे, जहां पानी का स्तर 40 मीटर से अधिक है, कृषि और किसान कल्याण विभाग से किसी भी सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए पात्र नहीं होंगे.

यह भी बताया गया कि ऐसे किसानों के लिए राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा धान की खरीद नहीं की जाएगी. लेकिन अब, नए दिशानिर्देशों में, इस स्थिति का कोई जिक्र नहीं है.

9 मई का आदेश, जो महानिदेशक कृषि से लेकर सभी उप निदेशकों को जारी किया गया था, उन्होंने विभिन्न ब्लॉकों में ग्राम पंचायतों की कृषि भूमि में भी कहा था, जहां भूजल स्तर 35 मीटर था, पंचायत अपनी भूमि में धान उगाने की अनुमति नहीं देगी. नए दिशानिर्देशों में इस शर्त को बरकरार रखा गया है.

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नए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि वैकल्पिक फसल लगाने वाले किसानों को आठ पहचाने गए ब्लॉकों में दो किस्तों में 7,000 रुपये प्रति एकड़ की मदद मिलेगी. वैकल्पिक फसलों का बीमा सरकार की जेब से सुनिश्चित किया जाएगा.

धान की खेती को लेकर बीजेपी और जेजेपी में भी मतभेद थे. यह बात तह सामने आई थी जब उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने किसानों को आश्वसन दिया था कि आप को धान की खेती करने से कौन रोक रहा है. सिर्फ पंचायत की जमीन पर रोक लगी है. आप फस की तैयारी करें.

जिसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार इस फैसले पर विचार करेगी और किसानों के लिए रास्ता खोलेगी.

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इस बीच, कांग्रेस ने सरकार द्वारा “यू-टर्न” पर जीत का दावा किया.

इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान की खेती प्रतिबंधों पर राज्य व्यापी आंदोलन की धमकी दी थी, और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष कुमारी शैलजा और कांग्रेस प्रक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को फतेहाबाद में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लिया.

शैलजा ने मांग की कि सरकार के 9 मई के आदेश को पूरी तरह से वापस लिया जाना चाहिए.

सुरजेवाला ने इस मुद्दे पर सरकार से बिना शर्त माफी की मांग की थी. उन्होंने कहा “आज हरियाणा के किसानों के लिए एक लाल अक्षर वाला दिन है. एक घमंडी खट्टर सरकार को धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने के अपने आदेश को उलटने के लिए मजबूर होना पड़ा. ”

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